क्षतृ (क्षता) शब्द के रूप (Kshatr Ke Shabd Roop) – संस्कृत

क्षतृ शब्द (द्वारपाल, दरवान, मछली, नियोग करनेवाला पुरुष, दासीपुत्र ): क्षतृ शब्द के ऋकारान्त पुल्लिंग शब्द के शब्द रूप, क्षतृ (Kshatr) शब्द के अंत में “ऋ” की मात्रा का प्रयोग हुआ इसलिए यह ऋकारान्त हैं। अतः Kshatr Shabd के Shabd Roop की तरह क्षतृ जैसे सभी ऋकारान्त पुल्लिंग शब्दों के शब्द रूप (Shabd Roop) इसी प्रकार बनाते है। क्षतृ शब्द के शब्द रूप संस्कृत में सभी विभक्तियों एवं तीनों वचन में शब्द रूप (Kshatr Shabd Roop) नीचे दिये गये हैं।

क्षतृ के शब्द रूप – Shabd roop of Kshatr

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथमा क्षता क्षतारौ क्षतारः
द्वितीया क्षतारम् क्षतारौ क्षतॄन्
तृतीया क्षत्रा क्षतृभ्याम् क्षतृभिः
चतुर्थी क्षत्रे क्षतृभ्याम् क्षतृभ्यः
पंचमी क्षतुः क्षतृभ्याम् क्षतृभ्यः
षष्ठी क्षतुः क्षत्रोः क्षतॄणाम्
सप्तमी क्षतरि क्षत्रोः क्षतृषु
सम्बोधन हे क्षता ! हे क्षतारौ ! हे क्षतरः !

क्षतृ शब्द का अर्थ/मतलब

क्षतृ शब्द का अर्थ द्वारपाल, दरवान, मछली, नियोग करनेवाला पुरुष, दासीपुत्र, वह वर्णसंकर जिसकी उत्पत्ति क्षत्रिय माता और शूद्र पिता से हो, ब्रह्मा (को॰), कोचवान । सारथी (को॰), रथ द्वारा युद्ध करनेवाला, रथी (को॰), कोशाध्यक्ष (को॰), क्षत करनेवाला, काटने या घाव करनेवाला (को॰) होता है। क्षतृ शब्द ऋकारान्त शब्द है इसका मतलब भी “द्वारपाल, दरवान, मछली, नियोग करनेवाला पुरुष, दासीपुत्र ” होता है।

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