सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) – अर्थ एवं परिभाषा, मुख्य विषय

Suchana Praudyogiki
Suchana Praudyogiki

सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) आँकड़ों की प्राप्ति, सूचना संग्रह, सुरक्षा, परिवर्तन, आदान-प्रदान, अध्ययन, डिजाइन आदि कार्यों तथा इन कार्यों के निष्पादन के लिये आवश्यक कंप्यूटर हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर अनुप्रयोगों से संबंधित है।

सूचना प्रौद्योगिकी का अर्थ एवं परिभाषा

‘मैकमिलन डिक्शनरी ऑफ़ इनफ़ोर्मेशन टेक्नोलाॅजी’ में सूचना प्रौद्योगिकी को परिभाषित करते हुए यह विचार व्यक्त किया गया है कि कंप्यूटिंग और दूरसंचार के संमिश्रण पर आधारित माईक्रो-इलेक्ट्रानिक्स द्वारा मौखिक, चित्रात्मक, मूलपाठ विषयक और संख्या संबंधी सूचना का अर्जन, संसाधन, भंडारण और प्रसार है।

सूचना प्रौद्योगिकी की परिभाषा (यूनेस्को के अनुसार)

सूचना प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकीय और इंजीनियरिंग विषय है। और सूचना की प्रोसेसिंग, उनके अनुप्रयोग की प्रबंध तकनीकें है। कंप्यूटर और उनकी मानव तथा मशीन के साथ अंत:क्रिया एवं संबद्ध सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक विषय।

सूचना प्रौद्योगिकी का महत्त्व

सूचना प्रौद्योगिकी, सेवा अर्थतंत्र (Service Economy) का आधार है। पिछड़े देशों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए सूचना प्रौद्योगिकी एक सम्यक तकनीकी (appropriate technology) है।

  • गरीब जनता को सूचना-सम्पन्न बनाकर ही निर्धनता का उन्मूलन किया जा सकता है।
  • सूचना-संपन्नता (सूचना-सम्पन्नता) से सशक्तिकरण होता है।
  • सूचना तकनीकी, प्रशासन और सरकार में पारदर्शिता लाती है, इससे भ्रष्टाचार को कम करने में सहायता मिलती है।
  • सूचना तकनीक का प्रयोग योजना बनाने, नीति निर्धारण तथा निर्णय लेने में होता है।
  • यह नये रोजगारों का सृजन करती है।

सूचना प्रौद्योगिकी की सहायता से सरकारी नीतियों को असरदार बनाया जा सकता है, साथ ही लोकतंत्र (लोकतन्त्र) की सभी पहलुओं को जन केंद्रित (केन्द्रित) किया जा सकता है ।

सूचना प्रौद्योगिकी के विभिन्न घटक

  • कंप्यूटर हार्डवेयर प्रौद्योगिकी
  • कंप्यूटर साफ्टवेयर प्रौद्योगिकी
  • दूरसंचार व नेटवर्क प्रौद्योगिकी
  • मानव संसाधन

भारत में सूचना प्रौद्योगिकी

भारत में सूचना प्रौद्योगिकी का क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। इस क्षेत्र में विभिन्न प्रयोगों का अनुसंधान करके विकास की गति को बढाया गया है। सूचना प्रौद्योगिकी में सूचना, आँकडे (डेटा) तथा ज्ञान का आदान प्रदान मनुष्य जीवन के हर क्षेत्र में फैल गया है।

हमारी आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, व्यावसायिक तथ अन्य बहुत से क्षेत्रों में सूचना प्रौद्योगिकी का विकास दिखाई पड़ता है। इलेक्ट्रानिक तथा डिजीटल उपकरणों की सहायता से इस क्षेत्र में निरंतर प्रयोग हो रहे हैं।

सूचना प्रौद्योगिकी, वर्तमान समय में वाणिज्य और व्यापार का अभिन्न अंग बन गयी है। संचार क्रान्ति के फलस्वरूप अब इलेक्ट्रानिक संचार को भी सूचना प्रौद्योगिकी का एक प्रमुख घटक माना जाने लगा है और इसे सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (Information and Communication TechnologyICT) भी कहा जाता है। एक उद्योग के तौर पर यह एक उभरता हुआ क्षेत्र है।

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT)

सूचना प्रौद्योगिकी में संचार क्रान्ति के फलस्वरूप अब इलेक्ट्रानिक संचार को भी सूचना प्रौद्योगिकी का एक प्रमुख घटक माना जाने लगा है और इसे सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) भी कहा जाता है। ICT का फुल फॉर्म इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशंस टेक्नोलॉजी (Information and Communications Technology, ICT) होता है।

शिक्षा के क्षेत्र में ICT की भूमिका

शैक्षिक अवसरों को विस्तृत करने, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास एवं शिक्षा की गुणवता बढ़ाने के लिये ICT एक प्रभावशाली साधन है। उच्च शिक्षा में बढ़ता नामांकन अनुपात तथा शिक्षा के विस्तार में प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता में ICT की भूमिका पर ‘नेशनल मिशन ऑफ एजुकेशन‘ बल देता है। इसके अन्तर्गत स्मार्ट स्कूलों एवं ई-किताबों के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

ICT शिक्षा के मुख्य विषय

1. कम्प्यूटर (Computer)

कंप्यूटर (अभिकलित्रसंगणकअभिकलकपरिकलक) एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिसके द्वारा डाटा को प्रोसेस किया जा सकता है। जिस प्रकार का डाटा हम कम्प्यूटर को हम देते हैं उसी के अनुसार हमें परिणाम प्राप्त होता है। और अधिक पढ़ें – कंप्यूटर (Computer)।

2. इंटरनेट (Internet)

इंटरनेट एक ऐसा साधन है जो देश-विदेश के लोगों को एक दूसरे से जोड़ता है, यह आजकल के युग में सबसे आधुनिक प्रणाली मानी गई है, इंटरनेट किसी भी एक कंपनी या सरकार के अधीन नहीं होता है, इसमें बहुत से Server जुड़े हुए होते हैं, जो कि अलग-अलग संस्थाओं और प्राइवेट कंपनियों के होते हैं। और अधिक पढ़ें – इंटरनेट (Internet)।

3. स्मार्टफ़ोन (Smartphone)

स्मार्ट फोन उन मोबाइल को कहते हैं जिनकी कम्प्युटिंग क्षमता तथा कनेक्टिविटी आधारभूत फोन की तुलना में अधिक उन्नत होती है। स्मार्टफोन में मिडिया प्लेयर, डिजिटल कैमरा, जीपीएस, टचस्क्रीन, वेब-ब्राउजिंग, वाई-फाई, अन्य पार्टियों के मोबाइल अनुप्रयोग (ऐप्स), गति-संसूचक (motion sensor), मोबाइल पेमेंट आदि विशेषताएं होती हैं। वर्तमान समय में लगभग 80% स्मार्टफोन गूगल के एंड्रॉइड तथा ऐपल के iOS मोबाइल प्रचालन तंत्रों पर आधारित हैं। और अधिक पढ़ें – स्मार्टफ़ोन (Smartphone)।

4. मुक्त शिक्षा संसाधन (Open Education Resource, OER)

इसके अंतर्गत “कौशल संवर्धन कक्षाएं, अनुदेशात्मक कक्षाएं, पाठ्यक्रम कक्षाएं, संकल्पना कक्षाएं, कक्षा से परे” आदि क्रियाओं को संचालित किया जाता है। विस्तार से जानें क्या होता है – मुक्त शिक्षा संसाधन (Open Education Resource, OER)।

5. डिजिटल शिक्षण सामग्री (Digital Teaching Aids)

डिजिटल शिक्षण सामग्री विशेष रूप से बच्चों के सीखने के लिये यह बहुत प्रभावी माध्यम साबित हो रहा है क्योंकि मौलिक ऑडियो-वीडियो सुविधा बच्चे के मस्तिष्क में संज्ञानात्मक तत्त्वों में वृद्धि करती है, बच्चों में जागरूकता, विषय के प्रति रोचकता, उत्साह और मनोरंजन की भावना बनी रहती है। वे सामान्य की अपेक्षा अधिक तेज़ी से सीखते हैं। विस्तार से जानें क्या होती है – डिजिटल शिक्षण सामग्री (Digital Teaching Aids)।

6. शिक्षण सम्बन्धी एप्प्स (Teaching Related Apps)

इस विषय में हम डिजिटल शिक्षण सामग्री के वितरण के लिए तथा प्रत्येक बच्चे तक पहुँचाने के लिए स्मार्टफ़ोन में जिन एप्प्स का विकास भारत या राज्य सरकार द्वारा किया गया है उनके बारे में जानेंगे। जैसे – दीक्षा एप्प, मोबाईल शिक्षा आदि। विस्तार से जानें क्या होते हैं – शिक्षण सम्बन्धी एप्प्स (Teaching Related Apps)।

7. शिक्षण कौशल विकास (Teaching Skill Development)

शिक्षण एक विज्ञान है। इस आधार पर प्रशिक्षण द्वारा अच्छे शिक्षक तैयार किये जा सकते हैं। उनमें शिक्षण के लिए आवश्यक कौशलों को विकसित किया जा सकता है। इन्हीं कौशलों का उपयोग कर कक्षा में प्रभावी शिक्षण कर अच्छे शिक्षक बन सकते है। अतः शिक्षक प्रशिक्षण में इन कौशलों का विकास महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है।

8. कक्षा शिक्षण तथा स्कूल प्रबंधन में ICT की भूमिका (Role of ICT in Classroom Education and School Management)

उच्च शिक्षा में बढ़ता नामांकन अनुपात तथा शिक्षा के विस्तार में प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता में ICT की भूमिका पर ‘नेशनल मिशन ऑफ एजुकेशन‘ बल देता है। इसके अन्तर्गत स्मार्ट स्कूलों एवं ई-किताबों के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सूचना प्रौद्योगिकी का प्रभाव

सूचना क्रान्ति से समाज के सम्पूर्ण कार्यकलाप प्रभावित हुए हैं – शिक्षा (e-learning), स्वास्थ्य (e-health), व्यापार (e-commerce), प्रशासन, सरकार (e-governance), उद्योग, अनुसंधान व विकास, संगठन, प्रचार, धर्म, आदि सब के सब क्षेत्रों में कायापलट हो गया है।

सूचना प्रौद्योगिकी ने पूरी धरती को एक गाँव बना दिया है। इसने विश्व की विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं को जोड़कर एक वैश्विक अर्थव्यवस्था को जन्म दिया है। यह नवीन अर्थव्यवस्था अधिकाधिक रूप से सूचना के रचनात्मक व्यवस्था व वितरण पर निर्भर है।

इसके कारण व्यापार और वाणिज्य में सूचना का महत्व अत्यधिक बढ गया है। इसीलिए इस अर्थव्यवस्था को सूचना अर्थव्यवस्था (Information Economy) या ज्ञान अर्थव्यवस्था (Knowledge Economy) भी कहने लगे हैं।

सूचना प्रौद्योगिकी का भविष्य

सूचना के महत्व के साथ सूचना की सुरक्षा का महत्व भी बढ़ेगा। सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े कार्यों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, विशेष रूप से सूचना सुरक्षा एवं सर्वर के विशेषज्ञों की मांग बढ़ेगी।

वर्तमान समय अर्थात कोरोना काल में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) का प्रत्येक क्षेत्र में जमकर प्रयोग किया गया। उदाहरण के लिए –

  1. वर्क फ्रॉम होम यानिकि घर पर वैठे-वैठे आप किसी कंपनी में काम कर सकते हैं।
  2. लर्न फ्रॉम होम यानिकि घर पर वैठे-वैठे शिक्षा ग्रहण करना।

अतः कहा जा सकता है कि समय के साथ सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े कार्यों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, तथा सूचना प्रौद्योगिकी का और अधिक व्यापक रूप से विकास होगा।