प्रकाश-वर्ष (Light Year) – दूरी का मात्रक, परिभाषा और अर्थ

Prakash Varsh - Light Year
Prakash Varsh – Light Year

प्रकाश-वर्ष (Light Year) दूरी का मात्रक होता हैं। प्रकाश-वर्ष को ly द्वारा प्रदर्शित करते हैं। भौतिकी में मापन के लिए हमें बहुत छोटी छोटी लम्बाइयों से लेकर बहुत बड़ी-बड़ी दूरियों के अध्ययन की आवश्यकता पड़ती है। बहुत छोटी व बहुत बड़ी दूरियो (अथवा लम्बाइयो) को व्यक्त करने के लिये हम विशेष मात्रकों का प्रयोग करते हैं। जैसे – माइक्रोन, एंग्स्ट्रोम, प्रकाश वर्ष, पारसेक, खगोलीय इकाई आदि।

प्रकाश-वर्ष (Light Year)

खगोलीय पिण्डों के बीच की दूरियाँ, जैसे पृथ्वी व सूर्य के बीच की दूरी, अथवा पृथ्वी से तारों की दूरी बहुत बड़ी होती हैं तथा उन्हें व्यक्त करने के लिये बड़े मात्रक प्रयुक्त किये जाते हैं। दूरी का एक बहुत बड़ा मात्रक ‘प्रकाश-वर्ष’ है।

1 प्रकाश-वर्ष वह दूरी है जो कि प्रकाश ‘रिक्त स्थान (निर्वात में) में’ 1 वर्ष में तय करता है।
  • 1 वर्ष में 365 x 24 x 60 x 60 = 31536000 सेकण्ड होते हैं।
  • प्रकाश 1 सेकण्ड में 3.0 x 108 मीटर (3 लाख किलोमीटर) दूरी तय करता है।

1 प्रकाश-वर्ष = (3.0×108 मीटर/सेकण्ड) x (365 x 24 x 60 x 60 सेकण्ड)
= 9.46 x 1015 मीटर
= 1016 मीटर (लगभग)
= 1013 किलोमीटर (लगभग)
1 प्रकाश वर्ष = 9.46 x 1015 मीटर

विज्ञान में मात्रकों की एस॰ आई॰ प्रणाली में दूरी का मात्रक मानक मीटर“, द्रव्यमान का मात्रक “मानक किलोग्राम“, समय का मात्रक “मानक सेकंड“, वैद्युत धारा का मात्रक “एम्पियर“, ताप का मात्रक “केल्विन“, तथा ज्योति-तीव्रता का मात्रक “कैन्डला” है।

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यह चैप्टर भौतिक विज्ञान के मापन का ही एक हिस्सा है, मापन चैप्टर से संबन्धित अन्य लेख इस प्रकार हैं-

ऐंग्स्ट्रॉम (Angstrom) – दूरी का मात्रक, परिभाषा और अर्थ

Angstrom
Angstrom

ऐंग्स्ट्रॉम (Angstrom) दूरी का मात्रक होता हैं। भौतिकी में मापन के लिए हमें बहुत छोटी छोटी लम्बाइयों से लेकर बहुत बड़ी-बड़ी दूरियों के अध्ययन की आवश्यकता पड़ती है। बहुत छोटी व बहुत बड़ी दूरियो (अथवा लम्बाइयो) को व्यक्त करने के लिये हम विशेष मात्रकों का प्रयोग करते हैं। जैसे – माइक्रोन, एंग्स्ट्रोम, प्रकाश वर्ष, पारसेक, खगोलीय इकाई आदि।

ऐंग्स्ट्रॉम (Angstrom)

परमाणवीय (atomic) तथा नाभिकीय (nuclear) भौतिकी मे लम्बाई का और भी सूक्ष्म मात्रक प्रयोग होता है। इसे ‘ऐग्स्ट्रॉम’ कहते है तथा इसे से प्रदर्शित करते है। यह प्रकाश की तरंगदैर्ध्य (𝛌) तथा परमाणु के आकार को व्यक्त करने हेतु प्रयुक्त होता है।

ऐग्स्टॉम (Å), माइक्रोन(µ) का दस-हजारवाँ भाग होता है।

  • 1 ऐग्स्ट्रॉम (Å) = 10-4 माइक्रोन (µ) = 10-10 मीटर
  • 1 ऐक्स-रे मात्रक =10-13 मीटर

विज्ञान में मात्रकों की एस॰ आई॰ प्रणाली में दूरी का मात्रक “मानक मीटर“, द्रव्यमान का मात्रक “मानक किलोग्राम“, समय का मात्रक “मानक सेकंड“, वैद्युत धारा का मात्रक “एम्पियर“, ताप का मात्रक “केल्विन“, तथा ज्योति-तीव्रता का मात्रक “कैन्डला” है।

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इंटरनेट पर निजी जानकारियों को कैसे सुरक्षित रखें

Internet Par Niji Jankari
Internet Par Niji Jankari

इंटरनेट पर निजी जानकारी का सुरक्षित होना एक भ्रम है। यदि आप अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है तो इंटरनेट पर निजी जानकारी देने से परहेज करें। 2018 में डाटा चोरी ने 100 करोड़ से ज्यादा लोगों को प्रभावित किया था और हर हफ्ते किसी ना किसी का डाटा चुराया गया था। क्या बिना जानकारी लीक करवाए इंटरनेट का प्रयोग संभव भी है? आपके डाटा के साथ क्या हो रहा है? नीचे मै कुछ सुझाव दे रहा हूं जिनमें ज्यादा समय भी जाया नहीं होगा और आपकी जानकारियां भी सुरक्षित रहेगी।

पता कीजिए कि क्या आपका डाटा चोरी हुआ है – पहले चेक कीजिए कि क्या आपका डाटा चोरी हुआ भी है । वेबसाइट “Have I been Pwned” में उन सारे अकाउंट्स की जानकारी है जिनका डाटा लीक हुआ है। आप अपनी इमेल आईडी या पुराना पासवर्ड डालकर पता कर सकते हैं कि क्या आपके अकाउंट ने भी डाटा चोरी का सामना किया है।

अपने पासवर्ड बदलें – जहां जहां भी आप पासवर्ड लगाते हैं उन्हें समय समय पर बदलते रहिए।

अलग-अलग पासवर्ड रखिए – हर चीज के लिए एक ही पासवर्ड रखना एक विनाशकारी विचार है। ऐसे में अगर किसी को आपका पासवर्ड पता लग गया तो वह आपके सारे अकाउंट्स हैक कर पाएगा।

पासवर्ड मैनेजर का करें प्रयोगLastPass और ipassword जैसे किसी पासवर्ड मैनेजर का प्रयोग करें । एक पासवर्ड मैनेजर आपके सारे पासवर्ड स्टोर रखता है और आपको ऐसे नए पासवर्ड बनाने में भी मदद करता है जिन्हे हैक करना अत्यंत ही कठिन हो।

Two factor authentication का करें प्रयोग – इसका प्रयोग करने से अगर कोई आपका पासवर्ड चुरा भी लेता है तब भी वह आपका अकाउंट इस्तेमाल नहीं कर पाएगा ।

अगर आप ज़्यादा खतरा या रिस्क महसूस करते हैं तो आप Yubikey जैसा कोई यंत्र खरीद लीजिए जिससे अकाउंट्स की सुरक्षा और भी बढ़ जाएगी। आसान चीजें जैसे ऐप और कंप्यूटर को अपडेट रखने से भी शैतानी हैकरों के हमले से बचा जा सकता है।

ऐड ट्रैकिंग को कीजिए बंद – अगली बात , ऐड ट्रैकिंग जब भी उपलब्ध हो उसे बंद कर दीजिए। हम जाने अनजाने में ही ऑनलाइन ऐड कंपनियों को अपनी काफी जानकारी दे देते हैं , लेकिन कुछ सर्विस हमें अपनी जानकारी को शेयर ना करने की सुविधा भी देती हैं।

बदलें अपना ब्राउज़र
– अगर आप एक कदम और आगे बढ़ना चाहते हैं तो कुछ ब्राउज़र जैसे Firefox Focus प्रयोग करें, जो हमेशा incognito mode में रहता है जिससे आपकी गतिविधियां सबसे छुपी रहती हैं और आप अन्य ब्राउज़र के मुकाबले अधिक सुरक्षित हो जाते है ।

Paid VPN – आखिर में एक paid VPN आपको इंटरनेट की भीड़ और अन्य लोगों से छुपा देता है। VPN आपकी जानकारियां तब और भी सुरक्षित रखता है जब आप एक सार्वजानिक वाई फाई इस्तेमाल कर रहे होते हैं। ये आपके डाटा को encrypt करता है जिससे उसे हैक या चोरी करना और भी कठिन हो जाता है।

क्रेडिट कार्ड की जांच करें – अगर आपको शक है कि आपकी अंदरूनी जानकारियां लीक हो गई हैं जिससे धोखाधड़ी संभव है तो जल्द ही क्रेडिट कार्ड कंपनी या बैंक से संपर्क करें।

फिर भी बेहतर यही होगा कि आप इंटरनेट पर अपनी निजी जानकारियों को बिल्कुल भी साझा ना करें। क्योंकि डाटा की चोरी से बचने के उपाय बेहद कम हैं। यह जान ले कि इंटरनेट पर कुछ भी सुरक्षित नहीं है। लेकिन फिर भी कुछ सावधानियां जो आप रख सकते हैं:

अपना पासवर्ड मजबूत रखे, I love you chinki, pinki जैसे पासवर्ड न ही रखें ना ही 12345678 या 87654321 या abcdefgh जैसे पासवर्ड भी बिल्कुल ना रखें ऐसे पासवर्ड हैकर्स द्वारा बड़ी ही सरलता से क्रैक किया जा सकता है। एक मजबूत पासवर्ड अक्षरों, अंकों और विशेष संकेत चिन्हों का संयोजन होना चाहिए। जैसे: a3₹#kolp, Priya980, Shalu.629, [email protected] आदि।

इंटरनेट पर अपरिचित वेबसाइटों से कुछ भी डाउनलोड ना करें। जिस फाइल के अंत में .exe लगा हो समझ लिजीए वो वायरस है।

सार्वजनिक स्थानों पर मुफ्त के वाइफाइ के लालच से बचें। कई बार हैकर्स स्वयं ही मुफ्त वाईफाई देकर डाटा की चोरी करते हैं। एवं अपने कम्प्यूटर के एंटी वायरस को अपडेट रखें।

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भारत में इंटरनेट किस वर्ष, कब आया? इसकी शुरुआत किसने की

Bharat Mein Internet Ki Shuruat Aur Samay
Bharat Mein Internet Ki Shuruat Aur Samay

भारत में पहली बार इंटरनेट 14 अगस्त 1995 में आया। विदेश संचार निगम लिमिटेड यह पहली कंपनी थी जिसने भारत में इंटरनेट को लाया, भारत में इंटरनेट की शुरुआत 14 अगस्त सन 1995 में हुई थी हालांकि इसे शुरू 15 अगस्त के दिन किया गया था।

विदेश संचार निगम लिमिटेड अपने अपने टेलेफोन लाइन ब्रॉडबैंड से के जरिए दुनिया से भारत के कंप्यूटरों को जोड़ा था। शुरुआती दौर में भारत में लगभग 20 से 30 से कंप्यूटर ही इंटरनेट से जुड़े हुए थे।शुरुआत के उस दौर में इंटरनेट की स्पीड भी बहुत ही कम थी। उस वक्त इंटरनेट की स्पीड 9 से 10 kbps थी। शुरुआती दौर में इंटरनेट का उपयोग सिर्फ महत्वपूर्ण जानकारियों के आदान-प्रदान के लिए किया जाता था। इससे कुछ बड़े-बड़े कॉलेज और संस्थान ही जुड़े हुए थे।

Bharat Mein Internet
Bharat Mein Internet

लगभग सन 1990 के दशक में आम प्रयोगकर्ता भी इसमें रूचि दिखने लगे, धीरे-धीरे सन 1992 तक इससे कई ढेर सारे भारतीय उपभोक्ता इन्टरनेट से जुड़ गए और आज लगभग लगभग 90% स्मार्टफोन धारक भारत में इंटरनेट का प्रयोग कर रहे हैं। जिनमें से एक आप भी हैं जो अभी इस पोस्ट को इंटरनेट के माध्यम से पढ़ रहे हैं। आज भारत इंटरनेट प्रयोग के मामले में प्रथम स्थान है पर है इसका श्रेय जियो को जाता है।

एक सर्वे के अनुसार भारत इंटरनेट की एवरेज स्पीड 6 mb प्रति सेकंड है। हालांकि यह स्पीड सभी राज्यों और सभी जगहों के लिए सामान्य नहीं है। कुछ जगहों पर आज भी इंटरनेट की स्पीड बहुत ही धीमी है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत का स्थान इंटरनेट स्पीड के मामले में 117वां है।

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सरकार इंटरनेट कैसे बन्द करवा देती है? बताइये

Internet Par Ban
Internet Par Ban

भारत में इंटरनेट बंद करने का तरीका– आपको बता दें कि केंद्र या राज्य के गृह सचिव इंटरनेट बैन करने का ऑर्डर देते हैं। इंटरनेट बैन के ऑर्डर को एसपी या उससे ऊपर के रैंक वाले अधिकारी के जरिए भेजा जाता है। इसके बाद अधिकारी टेलीकॉम कंपनी को उस राज्य में इंटरनेट बैन करने के लिए कहता है।

ऑर्डर को अगले वर्किंग डे में सरकार के रिव्यू पैनल के पास भेजा जाता है। यहां पैनल पांच दिन तक ऑर्डर का रिव्यू करता है। इस रिव्यू पैनल में कैबिनेट सेक्रेटरी, लॉ सेक्रेटरी और टेलीकम्युनिकेशन्स सेक्रेटरी शामिल होते हैं।

दूसरी तरफ राज्य सरकार की तरफ से दिए गए ऑर्डर के रिव्यू में चीफ सेक्रेटरी और लॉ सेक्रेटरी शामिल होते हैं। मंजूरी मिलने के बाद इंटरनेट पर बैन लगा दिया जाता है।

जॉइंट सेक्रेटरी धारा 144 के दौरान इंटरनेट पर लगा सकते हैं बैन

केंद्र और राज्य के गृह सचिव की तरफ से चुने गए जॉइंट सेक्रेटरी धारा 144 के दौरान इंटरनेट पर बैन लगाने का आदेश दे सकते हैं। लेकिन इस फैसले के लिए जॉइंट सेक्रेटरी को 24 घंटे के अंदर गृह सचिव से मंजूरी लेनी होती है।

इंटरनेट बैन के नियमों में हुआ बदलाव

वर्ष 2017 से पहले क्षेत्र के डीएम इंटरनेट बंद करने के आदेश देते थे। लेकिन, केंद्र सरकार ने इंडियन टेलीग्राफ ऐक्ट 1885 के तहत टेम्प्ररी सस्पेंशन ऑफ टेलीकॉम सर्विसेज (पब्लिक इमरजेंसी या पब्लिक सेफ्टी) नियम में बदलाव किया था, जिसके बाद अब केंद्र या राज्य के गृह सचिव इंटरनेट बैन का आदेश दे सकते हैं।

इंटरनेट सुविधाएं ठप करने के मामले में भारत का नाम दुनिया के सभी देशों में पहले नम्बर पर पहले ही पहुंच चुका था। अब किसी भी लोकतंत्र में सबसे लंबा इंटरनेट शटडाउन भी भारत में हो चुका है।

“जम्मू कश्मीर, असम, उत्तर प्रदेश” ये वो राज्य हैं जहां इस साल कई बार इंटरनेट बंद किया गया। यानी फोन में नेटवर्क होगा। कॉल, SMS हो जाएंगे। लेकिन इंटरनेट से चलने वाली सेवाएं आप इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। जैसे फेसबुक, वॉट्सऐप, ईमेल

2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सात साल में देश में 233 बार इंटरनेट बंद हुआ। भारत ऐसा देश बन गया जिसमें सबसे ज्यादा बार इंटरनेट बंद किया गया। 2018 में ही 100 से ज्यादा बार इंटरनेट बंद किया गया।

कश्मीर घाटी में 2019, 5 अगस्त को लगे इंटरनेट बैन को अब तक 134 दिन हो चुके हैं, ये अब तक का सबसे लंबा इंटरनेट बैन है। इससे पहले 2016 में वहां चार महीने तक इंटरनेट बंद रखा गया था।

लेकिन इंटरनेट बंद क्यों किया जाता है?

ताकि शांति बनाई रखी जा सके, हालात बेकाबू न हों। इंटरनेट के ज़रिए क्रिटिकल इनफॉर्मेशन (संवेदनशील सूचनाएं) बाहर न भेजी जा सकें। अफवाहें न फैलाई जा सकें। फ़ेक तस्वीरों या गलत ख़बरों के साथ।

मेघालय में रिलीज हुए ऑफिशियल मेमो में कारण बताया गया था, SMS, वॉट्सऐप और फेसबुक/ट्विटर/यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल ऐसे कॉन्टेंट को फैलाने में किया जा सकता है जो जनता में अशांति फैला सकते हैं, और कानून व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

राज्यसभा में बिल के पास होते ही जगह-जगह प्रोटेस्ट शुरू हो गए। 16 दिसंबर आते आते देश की कई यूनिवर्सिटीज़ में स्टूडेंट्स ने भी प्रोटेस्ट शुरू कर दिया क्योंकि जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था।

कैसे बंद किया किया जाता है इंटरनेट?

क्या सरकार के पास कोई स्विच होता है? जिसे ऑफ किया तो इंटरनेट बंद हो जाएगा? जवाब है, नहीं। सरकारें इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISPs) को निर्देश भेजती है, कि वो इंटरनेट सेवाएं बंद कर दें। अगर सरकारी टेलिकॉम कंपनी है तो कंट्रोल सरकार के अपने हाथ में है।

प्राइवेट कंपनी है, तो भी लाइसेंसिंग सरकार की ही होती है। इसलिए वो कंपनियां भी सरकारी आदेशों को अनदेखा नहीं करतीं। और जिस क्षेत्र में कहा गया है, वहां का इंटरनेट बंद कर देती हैं।इसके दो तीन तरीके हैं।पहला, इंटरनेट कनेक्टिविटी के जो डिवाइस लगे होते हैं कंपनी के पास, उनको बंद कर दिया जाता है।

इस तरह उस क्षेत्र का इंटरनेट पूरी तरह बंद हो जाता है।दूसरा, कुछ चुनिंदा वेबसाइट्स को बैन करना। जैसे पॉर्न साइट्स, या फिर खतरनाक स्पैम वाली साइट्स।इंटरनेट शटडाउन कई बार पूरी तरह नहीं होता। कई बार कुछ ख़ास साइट्स पर ट्रैफिक रोका जाता है। लेकिन अधिकतर मामलों में पूरी तरह इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी जाती हैं।

क्या इसके लिए कोई नियम भी है, या सरकार ऐसे ही इंटरनेट बंद कर सकती है?# 2017 में नियम आया। The Temporary Suspension of Telecom Services (Public Emergency or Public Safety) Rules। राज्यों के गृह मंत्रालय ही अधिकतर जिम्मा उठाते हैं। इंटरनेट बंद करने का। उसके लिए इसी कानून का सहारा लिया जाता है।

इससे पहले धारा 144 लगाकर इंटरनेट बंद किया जाता था। इसका इस्तेमाल सार्वजनिक जगहों पर शान्ति बनाए रखने के लिए किया जाता है। डीएम या एसडीएम इसके तहत निर्देश दे सकते हैं। इंटरनेट बंद करना इसी में शामिल है। इंडियन टेलीग्राफ एक्ट, 1885 भी इस लिस्ट में है। ये भी मैसेजिंग रोकने के लिए इस्तेमाल किया का सकता है।

इसका नुकसान क्या होता है? Indiaspend नाम की वेबसाइट के अनुसार 2011 से 2017 तक तकरीबन 16,000 घंटों तक इंटरनेट शटडाउन रहा भारत में। इसमें देश का तकरीबन 213.36 अरब रुपयों का नुकसान हुआ।

कश्मीर इससे सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका है। वहीं का उदाहरण ले लेते हैं। वॉशिंगटन पोस्ट में छपी रिपोर्ट बताती है कि ऑनलाइन बिजनेस बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। रोज सुबह 8.15 की ट्रेन पकड़ कर सैकड़ों लोग श्रीनगर से बनिहाल जाते हैं। जो जम्मू के बॉर्डर का एक शहर है। यहां इंटरनेट चालू है।

लोग अपने बिल पे करना, फॉर्म भरना, जरूरी पैसे ट्रांसफर करना, यहीं से कर रहे हैं।

न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट के अनुसार,ये इंटरनेट शटडाउन सिर्फ लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करते। वो पूरी इकॉनमी और छोटे धंधों पर असर डालते हैं। आम नागरिकों की रोजमर्रा की ज़िन्दगी पर भी असर पड़ता है। लोग बॉर्डर्स के आस-पास जाते हैं ताकि काम के ईमेल्स भेज सकें।

साल भर में, जुलाई 2017 से जून 2019 तक, इंटरनेट शटडाउन की वजह से पूरी दुनिया में ढाई बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ।

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इंटरनेट और इंट्रानेट में क्या अंतर है? इंटरनेट और इंट्रानेट में अंतर

Internet Aur Intranet Mein Antar
Internet Aur Intranet Mein Antar

हम में से अधिकांश लोग इंटरनेट और इंट्रानेट की शर्तों के बीच भ्रमित हो जाते हैं। यद्यपि उनके बीच बहुत अधिक असमानता मौजूद है, इनमें से एक अंतर यह है कि इंटरनेट सभी के लिए खुला है और सभी के द्वारा एक्सेस किया जा सकता है, जबकि, इंट्रानेट को निजी तौर पर ही प्रयोग किया जा सकता हैं।

इंटरनेट और इंट्रानेट में अंतर

इंटरनेट और इंट्रानेट के अंतर को विस्तार से जानने के लिए इनके बारे में अलग-अलग जानते हैं सबसे पहले इंटरनेट के बारे परिभाषा सहित तत्पश्चात इंट्रानेट के बारे में।

इंटरनेट

परिभाषा: इंटरनेट एक ग्लोबल नेटवर्क है इंटरनेट विभिन्न LAN, MAN और WAN का संग्रह है जो एक कनेक्शन स्थापित करता है और विभिन्न कंप्यूटरों के बीच सूचनाओ का आदान प्रदान करता है।

यह किसी भी जानकारी जैसे डेटा, ऑडियो, वीडियो आदि को भेजने और प्राप्त करने के लिए वायर्ड और वायरलेस दोनों प्रकार के संचार का उपयोग करता है। यहाँ, डेटा “फाइबर ऑप्टिक केबल” के माध्यम से ट्रेवल करता है, जो टेलीफोन कंपनियों के स्वामित्व में है।

इंट्रानेट

परिभाषा: इंट्रानेट इंटरनेट का एक हिस्सा है जो निजी तौर पर प्रयोग किया जाता है। इंट्रानेट ज्यादातर LAN, MAN या WAN है यह सभी कंप्यूटरों को एक साथ जोड़ता है और नेटवर्क के भीतर फाइलों और फ़ोल्डरों तक पहुंच प्रदान करता है।

इसमें अनजान उपयोगकर्ता को नेटवर्क तक पहुंचने से बचने के लिए सिस्टम के आसपास एक फ़ायरवॉल होता है। इसमें केवल अधिकृत उपयोगकर्ताओं को नेटवर्क तक पहुंचने की अनुमति है।

इसके अलावा, इंट्रानेट का उपयोग कंप्यूटर को जोड़ने और फर्म के भीतर डेटा, फ़ाइलों या दस्तावेजों को प्रसारित करने के लिए किया जाता है। यह जानकारी और फ़ोल्डर्स को शेयर करने का एक सुरक्षित तरीका है क्योंकि संगठन के भीतर नेटवर्क अत्यधिक सुरक्षित और प्रतिबंधित होता है। यह विभिन्न सेवाओं जैसे ईमेल, सर्च, डेटा संग्रहण आदि का प्रतिपादन करता है।

इंटरनेट और इंट्रानेट के बीच महत्वपूर्ण अंतर

  • इंटरनेट असीमित जानकारी प्रदान करता है जिसे हर कोई देख सकता है जबकि, इंट्रानेट सीमित होता हैं इसमें डेटा संगठन के भीतर प्रसारित होता है।
  • इंटरनेट सभी को पहुँच प्रदान करता है, जबकि, इंट्रानेट को पहुच प्रदान नहीं करता है।
  • इंटरनेट का स्वामित्व किसी एक या एक से अधिक संगठन के पास नहीं होता है, जबकि, इंट्रानेट एक निजी नेटवर्क है जो एक फर्म या एक संस्थान से संबंधित है।
  • इंटरनेट सभी के लिए उपलब्ध है जबकि, इंट्रानेट प्रतिबंधित है।
  • इंटरनेट की तुलना में इंट्रानेट सुरक्षित होता है।

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भारतीय रेलवे के पास इतना इंटरनेट कहाँ से आता है कि वह फ्री में बाँटता है?

Free Internet at Railway Stations
Free Internet at Railway Stations

भारतीय रेलवे सभी रेलवे स्टेशन पर मुफ्त इंटरनेट कैसे देता है? इसे जानने से पहले यह जानते है कि रेलवे कैसे सफ़र करने वालों को फ्री में इंटरनेट की सुविधा देता है ?

इंटरनेट कैसे काम करता है ?

आप अपने मोबाइल में इंटरनेट कैसे इस्तेमाल करते है? आपका जवाब होगा टावर के माध्यम से या फिर सेटलाइट के माध्यम से लेकिन आप अपने अनुसार तो सही है लेकिन आपका जवाब बिलकुल गलत है और आप उस तथ्य को नहीं जानते है कि आखिर यह इंटरनेट कहाँ से आता है ?

आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि पूरी दुनिया का 99 प्रतिशत इंटरनेट केबल ऑप्टिकल फाइबर वायर के माध्यम से चलती है और दुनिया के सभी देशों को उसी वायर के माध्यम से जोड़ दिया गया है जिसे सबमरीन केबल कहा जाता है और इस वायर को समुद्र के रास्ते सभी देशों को जोड़ा गया है।

Internet Optical Wire
Internet Optical Wire

इन सबमरीन केबल को बिछाने का काम बड़ी बड़ी कंपनियों द्वारा किया जाता है, जिसे टायर वन कंपनी कहा जाता है और यह वायर सभी देशों के समुद्र तट इलाको के महत्वपूर्ण शहरों तक लाया गया है ।

इसके बाद उन्ही समुद्र तटीय इलाको के महत्वपूर्ण शहरों से भारत के विभिन्न शहरों तक यह वायर बिछाया गया है। जिसे बीएसएनएल , जिओ , एयरटेल इत्यादि ने बिछाया है। और इसे टायर टू कंपनी कहा जाता है और भारत के इन्हीं संचार कंपनियों ने अपना वायर बिछा कर सबमरीन केबल से जोड़ दिया है।

भारतीय रेलवे मुफ्त इंटरनेट सेवा कैसे देती है ?

अब आते है अपने टॉपिक के महत्वपूर्ण बिंदु पर कि भारतीय रेलवे मुफ्त इंटरनेट सेवा कैसे देती है और इसका एक उदाहरण देता हूँ मान लीजिये आपके पास दो कंप्यूटर है और दोनों कंप्यूटर से फाइल या फिल्म का आदान प्रदान करना हो तो कैसे करेंगे ? ब्लूटूथ या wifi से आपको घंटो लग जायेंगे लेकिन दोनों कंप्यूटर को वायर या केबल के माध्यम से जोड़ दिया जाये तो आप कुछ ही मिनटों में फाइल ट्रान्सफर कर सकेंगे ।

Free Wifi by Indian Railway
Free Wifi by Indian Railway

आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि दुनिया के किसी भी सर्वर का डाटा फ्री में भेजा या लाया जाता है । इसका मतलब है कि इंटरनेट को कोई भी पैसा नहीं लगता है । यह पूरी तरह से फ्री होता है।

तो आपके मन में सवाल आएगा कि इंटरनेट फ्री है तो हमसे पैसे क्यों लिया जाता है तो इसका जवाब है कि टायर वन कंपनी जिसने अपना पैसा लगा कर सबमरीन केबल को समुद्र में बिछाया है और वह पैसा टायर टू कंपनी बीएसएनएल, जिओ, एयरटेल इत्यादि हमसे लेकर और कुछ प्रतिशत रख कर दे दिया जाता है।

Free Wifi Hotspot
Free Wifi Hotspot

अब कुछ कुछ बातें आपको समझ में आ गयी होंगी आपको बता दूँ कि भारतीय रेलवे अपने शुरुआत के दिनों में इंटरनेट के लिए बीएसएनएल पर आश्रित था बाद में भारतीय रेलवे ने अपनी पहुँच को बढ़ने के लिए सितम्बर 2000 में रेलटेल नामक एक सरकारी PSU कंपनी की शुरुआत की ।

जिसके द्वारा पुरे भारत में हाई स्पीड ऑप्टिकल फाइबर वायर बिछाया गया वर्तमान में यह हाई स्पीड ऑप्टिकल फाइबर वायर लगभग 45 हज़ार किलोमीटर तक फैला हुआ है । और लगभग 5 हजार रेलवे स्टेशन से जुड़ा हुआ है जिससे फ्री में इन रेलवे स्टेशन को हाई स्पीड इन्टरनेट से जोड़ दिया गया है।

Free Google Wifi by Indian Railway
Free Google Wifi by Indian Railway

फिर कुछ समय बाद रेलवे ने यह निर्णय लिया कि यह सुविधा आम लोगो को भी दिया जाये क्योंकि भारतीय रेलवे के पास खुद का हाई स्पीड ऑप्टिकल फाइबर बिछा हुआ था तो पैसे केवल टायर वन कंपनी को ही देने थे तो इसके लिए रेलवे ने Google से एक समझौता किया और गूगल ने अपनी उच्च तकनीक लगाकर एक सुरक्षित wifi हॉटस्पॉट बनाया जिसका रेंज सिर्फ रेलवे स्टेशन तक रखा गया।

अब आपको समझ में आ गया होगा कि भारतीय रेलवे के पास इतना सारा इंटरनेट कहाँ से आता है कि वह फ्री में बाँटता है।

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इंटरनेट का अविष्कार किसने किया? – इंटरनेट के पिता, जनक, खोजकर्ता या आविष्कारक

Internet Ka Avishkar
Internet Ka Avishkar

इंटरनेट के पिता, जनक, खोजकर्ता या आविष्कारक: इन्टरनेट जैसा वास्तव में है और जैसा हम सोचते हैं कि इन्टरनेट है उनके बीच एक भारी अंतर है। आइए पहले इस बारे में स्पष्ट कर देते हैं, और फिर हम बात करेंगे कि किसने क्या किया था।हम अपने मोबाइल फोनों, कम्प्यूटरों और टैबलेट पर जो देखते हैं तथा जो कुछ भी आदान-प्रदान करते हैं, वह सब कुछ वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) का हिस्सा है। और फिर, हम वर्ल्ड वाइड वेब पर उपलब्ध सामग्री तक पहुँचने के लिए ही इन्टरनेट का उपयोग करते हैं। थोड़ा अधिक तकनीकी शब्दों में कहे तो-

इन्टरनेट– आपस में जुड़े कम्प्यूटर नेटवर्कों की एक वैश्विक प्रणाली है जो इन्टरनेट प्रोटोकॉल सुइट (टीसीपी/आईपी) का प्रयोग करके दुनिया भर की डिवाइसों को जोड़ता है।

वर्ल्ड वाइड वेब – यह एक सूचना रखने की जगह है जहाँ सभी वेब संसाधन संग्रहित होते हैं और इन्टरनेट के ज़रिये उन तक पहुंचा जा सकता है।

एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट एजेंसी के वैज्ञानिको ने दुनिया का पहला नेटवर्क बनाया था जिसे आरपानेट कहते हैं |यह हुआ था १९६० के दशक में। १९८० में टीसीपी/आईपी सूट का विकास हुआ,१९८६ में अमेरिका की नेशनल साइंस फाउंडेशन ने एनएसएफनेट का विकास किया , यह इंटरनेट की रीढ़ है। इसके बाद से इंटरनेट शब्द प्रचलन में आया।

अब जब कि आप इस अंतर को समझ चुके हैं, यह पता लगाना आसान हो जाता है सबसे जरुरी काम किसने किया था।

चूंकि इन्टरनेट टीसीपी/ आईपी पर चलता है, तो हम इस निष्कर्ष पर पहुँच सकते हैं कि जिन्होंने इन प्रोटोकॉल्स का सृजन किया उन्हें इन्टरनेट की खोज का श्रेय दिया जा सकता है। 1 जनवरी 1983 को हुआ इसका अविष्कार रॉबर्ट ई कान और विंट सर्फ [Robert E. Kahn & Vint Cerf] ने किया था

  • रोबर्ट इलियट काह्न (बॉब काह्न के रूप में जाने जाते हैं), और
  • विन्टन ग्रे सर्फ़ (विन्ट सर्फ़ के रूप में भी जाने जाते हैं)

वर्ल्ड वाइड वेब के बारे में बात करें तो, इसका सृजन भी वहीँ हुआ था जहाँ लार्ज हैड्रन कोलाईडर का हुआ था – जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में स्थित सीईआरएन मुख्यालय । सर टिमथी जॉन बर्नर्स-ली नामक व्यक्ति ने पूरे वर्ल्ड वाइड वेब की रचना की थी, जिन्हें टिम बर्नर्स-ली या TimBL के नाम से भी जाना जाता है।

मैं इस उत्तर में अन्य कोई सामग्री या चित्र पोस्ट न करने के लिए माफी चाहूँगा, लेकिन ये चीजें प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। आप उनके नाम से गूगल पर खोज कर ये सारी जानकारी पा सकते हैं।

इंटरनेट पर संबन्धित लेख

इंटरनेट पर बच्चों के लिए अच्छी वेबसाइट

Internet Par Acchi Website Ki List
Internet Par Acchi Website Ki List

ये बच्चे की उम्र पर निर्भर करता है, कृपया अपने प्रश्न में स्पष्ट करें कि आप किस उम्र के बच्चों के बारे में जानना चाहेंगे, कभी हो सकता है आप किसी और उम्र के बच्चों के लिए ढूंढ रहे हों और उत्तर लिखने वाला किसी और उम्र के बच्चों को सोच कर उत्तर लिखें। फिर भी बच्चो के लिए हम यहाँ उपयोगी वैबसाइट बताएँगे।

Internet की दुनिया में ऐसे बहुत सी website हैं जहाँ बच्चो के लिए कविता और कहानिया मिल जाती हैं लेकिन इन में ज़यादा तर website english में होती हैं.आज मै आप को एक ऐसी website के बारे में बताने वाला हूँ जो बच्चो के लिए बहुत मजेदार है क्यों की ये एक hindi वेबसाइट है.अगर आप के घर में भी बच्चे हैं तो आप एक बार इस website को open कर के ज़रूर देखें।

हिन्दी की बिंदी नाम का ये website पूरी तरह से hindi में है और यहाँ बच्चो के लिए ढेर सारी मनोरंजक और ज्ञान वर्धक चीजे हैं.इस website पर अलग अलग उम्र के बच्चो के लिए अलग अलग सेक्शन है.उदाहरण के लिए नन्हे-मुन्ने नाम का एक सेक्शन है जिसमे 3 से 5 साल तक के बच्चों के लिए सामग्री उपलव्ध है, जिसमे rhymes and stories हैं , वर्णज्ञान हैं जो बच्चों को सारे वर्णों की जानकारी देता है।

अंकज्ञान के अन्तर्गत सारे अंकों का विवरण है, जो बच्चों को अंको के बारे में जानकारी देता है इसके अलावा रंग भरने के लिए भी चित्र हैं ,जहाँ बच्चा चित्रकारी कर सकता है इसके अलावा कविता भी है।

इसके अलावा एक सेक्शन नटखट है जो थोड़े बड़े बच्चो के लिए है और एक सेक्शन युवा के लिए भी है जिसमे बहुत सारी rhymes and stories हैं।

इस website का सबसे मजेदार पन्ना stories वाला है। इस सेक्शन में बहुत सारी stories हैं जिनको पढ़ के आप को भी अपना बचपन याद आ जायेगा।
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इंटरनेट पर संबन्धित लेख

इंटरनेट क्या है? जानिए इसके फायदे और नुकसान

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इंटरनेट क्या है? इंटरनेट एक ऐसा साधन है जो देश-विदेश के लोगों को एक दूसरे से जोड़ता है, यह आजकल के युग में सबसे आधुनिक प्रणाली मानी गई है, इंटरनेट किसी भी एक कंपनी या सरकार के अधीन नहीं होता है, इसमें बहुत से Server जुड़े हुए होते हैं, जो कि अलग-अलग संस्थाओं और प्राइवेट कंपनियों के होते हैं।

आप इंटरनेट की सहायता से देश विदेश की जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं, इंटरनेट की कुछ सेवाएं जैसे File Transfer, Protocol, World Wide Web का इस्तेमाल इंटरनेट में जानकारियां प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

इंटरनेट की सहायता से आप एक जगह से दूसरी जगह पर Messages भेज सकते हैं, इतना ही नहीं बल्कि आप इंटरनेट पर Text Message, images, MP3, Videos भी आसानी से भेज या फिर ढूंढ सकते हैं।

जहां पर सूचना सुरक्षित रखी जाती है उसको Server कहा जाता है, हम अपने कंप्यूटर या मोबाइल में जो इंटरनेट पर मौजूद सूचनाएं प्रयोग करते हैं उसको Client कहा जाता है, हम कोई भी सूचना या खबर जानने के लिए Web Browser का इस्तेमाल करते हैं यह क्लाइंट प्रोग्राम होते हैं, जो कि दस्तावेजों के साथ संवाद करने और उनको प्रदर्शित करने में सक्षम रहते हैं।

इंटरनेट की परिभाषा सरल शब्दों में

अगर हम सरल शब्दों में इंटरनेट की परिभाषा जाने तो यह एक प्रकार का Global Wide Area Network होता है, जो कि विश्व भर के सभी Computers Systems से आपस में जुड़ा रहता है, इसके अंदर बहुत से High bandwidth Data Lines मौजूद होती है, जिसको इंटरनेट का बैकबोन (Backbone) कहा जाता है, यह सभी लाइंस को एक दूसरे में कनेक्ट करती है, अगर आप इंटरनेट का प्रयोग करना चाहते हैं तो इसके लिए आपके पास इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (Internet Service Provider ISP ) का Access होना बहुत ही जरूरी है।

इंटरनेट के पिता, जनक, खोजकर्ता या आविष्कारक

एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट एजेंसी के वैज्ञानिको ने दुनिया का पहला नेटवर्क बनाया था जिसे आरपानेट कहते हैं |यह हुआ था १९६० के दशक में। १९८० में टीसीपी/आईपी सूट का विकास हुआ,१९८६ में अमेरिका की नेशनल साइंस फाउंडेशन ने एनएसएफनेट का विकास किया , यह इंटरनेट की रीढ़ है। इसके बाद से इंटरनेट शब्द प्रचलन में आया।

अब जब कि आप इस अंतर को समझ चुके हैं, यह पता लगाना आसान हो जाता है सबसे जरुरी काम किसने किया था।

चूंकि इन्टरनेट टीसीपी/ आईपी पर चलता है, तो हम इस निष्कर्ष पर पहुँच सकते हैं कि जिन्होंने इन प्रोटोकॉल्स का सृजन किया उन्हें इन्टरनेट की खोज का श्रेय दिया जा सकता है। 1 जनवरी 1983 को हुआ इंटरनेट का अविष्कार रॉबर्ट ई कान और विंट सर्फ [Robert E. Kahn & Vint Cerf] ने किया था

  • रोबर्ट इलियट काह्न (बॉब काह्न के रूप में जाने जाते हैं), और
  • विन्टन ग्रे सर्फ़ (विन्ट सर्फ़ के रूप में भी जाने जाते हैं)
Internet Kya Hain
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इंटरनेट के फायदे

  • आप घर बैठकर कोई भी कौशल जो आप सीखना चाहते है, सीख सकते है.
  • आप दूर-दराज बैठे अपने सगे-सम्बन्धियों से बात कर सकते है.
  • अगर आप में कोई हुनर तो उसका उपयोग करके आप लोगो की नज़रो में आ सकते है, अपनी पहचान बना सकते है और पैसे भी कमा सकते है.
  • आप अपनी कोई बात, राय या दृष्टिकोण लोगों के साथ साझा कर सकते है.
  • आप किसी भी परीक्षा की तैयारी अब घर बैठ कर सकते है, आपको अब दूसरे शहर में जाकर अपने परिवार जनों से दूर रहने की आवश्यकता नहीं है.
  • अब चाहे बिजली का बिल हो या पानी का , टेलीफ़ोन का भी साथ में ले लेना, सिनेमा की टिकट्स बुक करवानी हो, या किसी मैच की, डीटीएच कनेक्शन रीन्यू करवाना हो या स्कूल कॉलेज की फीस भरनी हो , सबके भुगतान अब आप घर बैठ कर सकते है.
  • रुपयों का लेनदेन भी इंटरनेट की मदद से अब सरल और सुरक्षित होता जा रहा है.
  • आप अपनी सोशल प्रोफाइल को मज़बूत बनाकर घर बैठे अपने अच्छे कनेक्शंस बना सकते है.

इंटरनेट के नुकसान

  • फेसबुक, इंस्टाग्राम पर अन्य व्यक्तियों की ज़िन्दगी में झाँकना।
  • अश्लील सामग्री को एक्सेस करना।
  • सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर फेक प्रोफाइल बनाकर लोगो को परेशान करना।
  • झूठी खबर बनाकर उसको वायरल करना।
  • ऑनलाइन ठगी करना।
  • अन्य व्यक्तियों की भावनाओ को ठेस पहुँचाना।
  • पैसे जल्दी और आसानी से कमाने के तरीके ढूँढना।
  • जल्दी से मशहूर कैसे हो जाएं, उसके उपाय खोजना।
  • ज़रूरत से ज्यादा सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट का उपयोग करके समय की बर्बादी करना।

जैसे-जैसे समय बदलता जा रहा है वैसे-वैसे दुनिया भर की चीजें भी बदलती जा रही है, आजकल के आधुनिक युग में इंटरनेट सूचना तकनीक सबसे बेहतर परिणाम प्रणाली मानी जाती है, आप ऐसा कह सकते हैं कि आप घर बैठे-बैठे इंटरनेट पर दुनिया भर की जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं, यह एक विश्व स्तरीय नेटवर्क है, जिसके माध्यम से लाखों-करोड़ों कंप्यूटर्स एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

इंटरनेट नेटवर्क ने हर जगह अपना महाजाल बिछा रखा है, यह एक ऐसा Network है जिससे सभी लोग एक दूसरे से जुड़े रहते हैं, अगर आप किसी भी डिवाइस का इस्तेमाल करके कोई भी खबर पढ़ते हैं तो यह इंटरनेट की सहायता से हो पा रहा है, आजकल के आधुनिक युग में लगभग ज्यादातर चीजों के लिए हमें Internet का इस्तेमाल करने लगे हैं।

आप भी रोजाना इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कभी आपने इस बात पर विचार किया है कि आखिर इंटरनेट क्या है? और इंटरनेट से मिलने वाले फायदे और नुकसान क्या-क्या होते हैं? हमारे ख्याल से आप लोगों ने कभी इस बात पर गौर नहीं किया होगा।

दुनिया में बहुत से लोग ऐसे हैं जो अभी भी इंटरनेट क्या है? इसके बारे में नहीं जानते हैं, लेकिन सभी लोग इंटरनेट का इस्तेमाल रोजाना ही करते हैं, आप चाहे घर पर हो या फिर कहीं बाहर हो, आपको हर स्थान पर इंटरनेट सुविधा मिल जाती है, इसी वजह से इंटरनेट के बारे में आपको सारी Knowledge होना आवश्यक है।

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