जगत् शब्द के रूप – Jagat ke Roop – Sanskrit

जगत् शब्द (Jagat Shabd, World, दुनिया): तकारान्त क्विवलिङ्ग शब्द , इस प्रकार के सभी नपुन्सकलिङ्ग शब्दों के शब्द रूप (Shabd Roop) इसी प्रकार बनाते है।

जगत् के शब्द रूप – Jagat Shabd Roop

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथमा जगत् / जगद् जगती जगन्ति
द्वितीया जगत् / जगद् जगती जगन्ति
तृतीया जगता जगद्भ्याम् जगद्भीः
चतुर्थी जगते जगद्भ्याम् जगदभ्यः
पंचमी जगतः जगद्भ्याम् जगदभ्यः
षष्ठी जगतः जगतोः जगताम्
सप्तमी जगति जगतोः जगत्सु
सम्बोधन हे जगत् ! हे जगती ! हे जगन्ति !

जगत् (Jagat) संस्कृत भाषा का एक महत्वपूर्ण शब्द है, जिसका अर्थ संसार, दुनिया या ब्रह्मांड होता है。व्याकरण की दृष्टि से यह ‘त्’ (तकारान्त) नपुंसकलिङ्ग शब्द है। यह ज्ञान धार्मिक, दार्शनिक और संस्कृत व्याकरण की पढ़ाई के लिए बेहद उपयोगी है।

जगत् (Jagat) के मुख्य अर्थ और प्रयोग

  • संसार/दुनिया: समस्त भौतिक जगत या पृथ्वी।
  • चेतन सृष्टि: चलने-फिरने वाले जीव या प्राणी।
  • विशेष कार्यक्षेत्र: किसी विशेष समूह या क्षेत्र से जुड़ा दायरा (जैसे- साहित्य जगत्, नारी जगत्)।
  • अन्य अर्थ: कुएँ के चारों ओर बनी गोलाकार मुँडेर या मेढ़ (यह देशज हिंदी में ‘जगत’ कहलाता है)

जगत् से जुड़े कुछ प्रसिद्ध वाक्यांश

  • जगत् पिता: संसार के रचयिता या पालनहार।
  • जगत् जननी: संसार की माता (माँ जगदम्बा)।
  • जगन्नाथ: संसार के नाथ (भगवान जगन्नाथ, पुरी)।

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