ब्रह्मन् शब्द (ब्रह्म- एक मात्र नित्य चेतन सता): ब्रह्मन् शब्द के नकारान्त नपुंसकलिंग शब्द के शब्द रूप, ब्रह्मन् (Brahman) शब्द के अंत में “न्” की मात्रा का प्रयोग हुआ इसलिए यह नकारान्त हैं। अतः Brahman Shabd के Shabd Roop की तरह ब्रह्मन् जैसे सभी नकारान्त नपुंसकलिंग शब्दों के शब्द रूप (Shabd Roop) इसी प्रकार बनाते है। ब्रह्मन् शब्द के शब्द रूप संस्कृत में सभी विभक्तियों एवं तीनों वचन में शब्द रूप (Brahman Shabd Roop) नीचे दिये गये हैं।
ब्रह्मन् के शब्द रूप – Shabd roop of Brahman
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | ब्रह्म | ब्रह्मणी | ब्रह्माणि |
| द्वितीया | ब्रह्म | ब्रह्मणी | ब्रह्माणि |
| तृतीया | ब्रह्मणा | ब्रह्मभ्याम् | ब्रह्मभिः |
| चतुर्थी | ब्रह्मणे | ब्रह्मभ्याम् | ब्रह्मभ्यः |
| पंचमी | ब्रह्मणः | ब्रह्मभ्याम् | ब्रह्मभ्यः |
| षष्ठी | ब्रह्मणः | ब्रह्मणोः | ब्रह्मणाम् |
| सप्तमी | ब्रह्मणि | ब्रह्मणोः | ब्रह्मसु |
| सम्बोधन | हे ब्रह्मन् ! | हे ब्रह्मणी ! | हे ब्रह्माणि ! |
ब्रह्मन् शब्द का अर्थ/मतलब
ब्रह्म- एक मात्र नित्य चेतन सता जो जगत् का कारण हे । सत्, चित्, आनंद स्वरुप तत्व जिसके अतिरिक्त और जो कुछ प्रतीत होता है, सब असत्य़ और मिथ्या है होता है। ब्रह्मन् शब्द नकारान्त शब्द है इसका मतलब भी “ब्रह्म- एक मात्र नित्य चेतन सता” होता है। 1. ईश्वर । परमात्मा । 2. आत्मा । चैतन्य । जैसे,—जैसा तुम्हारा ब्रह्म कहे, वैसा करो । 3. ब्राह्मण (विशेषतः समस्तपदों में प्राप्त) । जैसे ब्रह्मद्रोही, ब्रह्माहत्या । उ॰— चल न ब्रह्मकुल सन बरिआई । सत्य कहौं दोउ भुजा उठाई ।—तुलसी (शब्द॰) । 4. ब्रह्मा (अधिकतर समास में) । 5. ब्राह्मण जो मरकर प्रेत हुआ हो । ब्राह्मण भुत । ब्रह्मराक्षस । मुहा॰—ब्रह्म लगना =किसी के ऊपर ब्राह्मण प्रेत का अधिकार होना । उ॰—तासु सुता रहि सुछबि विशाला । ताहि लग्यो इक ब्रह्य कराला ।—रघुराज (शब्द॰) । 6. वैद । 7. एक की संख्या । 8. फलित ज्योतिष में २७ योगों में से पचीसवाँ योग जो सब कार्यों के लिये शुभ कहा गया है । 9. संगीत में ताल के चार भेदों में से पक (को॰) । 10. ब्राह्मणत्व (को॰) । 11. प्रणव । ओंकर (को॰) । 12. सत्य (को॰) । 13. धन (को॰) । 14. भोजन (को॰) ।
