विभ्राट् शब्द (आपत्ति, विपत्ति, संकट): विभ्राट् शब्द के टकारान्त पुल्लिंग शब्द के शब्द रूप, विभ्राट् (Vibhrat) शब्द के अंत में “ट्” की मात्रा का प्रयोग हुआ इसलिए यह टकारान्त हैं। अतः Vibhrat Shabd के Shabd Roop की तरह विभ्राट् जैसे सभी टकारान्त पुल्लिंग शब्दों के शब्द रूप (Shabd Roop) इसी प्रकार बनाते है। विभ्राट् शब्द के शब्द रूप संस्कृत में सभी विभक्तियों एवं तीनों वचन में शब्द रूप (Vibhrat Shabd Roop) नीचे दिये गये हैं।
विभ्राट् के शब्द रूप – Shabd roop of Vibhrat
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | विभ्राट्/ विभ्राड् | विभ्राटौ | विभ्राटः |
| द्वितीया | विभ्राटम् | विभ्राटौ | विभ्राटः |
| तृतीया | विभ्राटा | विभ्राड्भ्याम् | विभ्राड्भिः |
| चतुर्थी | विभ्राटे | विभ्राड्भ्याम् | विभ्राड्भ्यः |
| पंचमी | विभ्राटः | विभ्राड्भ्याम् | विभ्राड्भ्यः |
| षष्ठी | विभ्राटः | विभ्राटोः | विभ्राटाम् |
| सप्तमी | विभ्राटि | विभ्राटोः | विभ्राट्त्सु |
| सम्बोधन | हे विभ्राट्/ विभ्राड् ! | हे विभ्राटौ ! | हे विभ्राटः ! |
विभ्राट् शब्द का अर्थ/मतलब
विभ्राट् शब्द का अर्थ आपत्ति, विपत्ति, संकट होता है। विभ्राट् शब्द टकारान्त शब्द है इसका मतलब भी “आपत्ति, विपत्ति, संकट” होता है। – उपद्रव । बखेड़ा । उ॰—(क) तिलक विभ्राट के समय गोखले विलायत में थे ।—सरस्वती (शब्द॰) । (ख) कुछ न कुछ बिघटित हुआ विभ्राट् । – विभ्राट् ^२ वि॰ [सं॰ विभ्राज्] प्रकाशमान् । दीप्तिमान् । उ॰—भर सको अगर तो प्रतिमा में चेतना भरो, यदि नहीं निमंत्रण दो जीवन के दानी को । विभ्राट् महावल जहाँ थके से दीख रहे, आगे आने दो वहाँ क्षीणबल प्राणी को।
