तण्डुल शब्द (Tandula Shabd): Taṇḍula, तंडुल, चावल, rice; अकारांत पुल्लिंग शब्द; इस प्रकार के सभी अकारांत पुल्लिंग शब्दों के शब्द रूप (Shabd Roop) इसी प्रकार बनाते है। तण्डुल के शब्द रूप इस प्रकार हैं-
तण्डुल के शब्द रूप – Shabd Roop of Taṇḍula
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | तण्डुलः | तण्डुलौ | तण्डुलाः |
| द्वितीया | तण्डुलम् | तण्डुलौ | तण्डुलान् |
| तृतीया | तण्डुलेन | तण्डुलाभ्याम् | तण्डुलैः |
| चतुर्थी | तण्डुलाय | तण्डुलाभ्याम् | तण्डुलेभ्यः |
| पंचमी | तण्डुलात् | तण्डुलाभ्याम् | तण्डुलेभ्यः |
| षष्ठी | तण्डुलस्य | तण्डुलयोः | तण्डुलानाम् |
| सप्तमी | तण्डुले | तण्डुलयोः | तण्डुलेषु |
| सम्बोधन | हे तण्डुल ! | हे तण्डुलौ ! | हे तण्डुलाः ! |
📖 शब्द का अर्थ (Meaning)
तण्डुल (Tandula) एक संस्कृत मूल का पुल्लिंग संज्ञा शब्द है, जिसका मुख्य अर्थ ‘चावल’ (Rice) होता है। विशेष रूप से धान के ऊपर का छिलका (भूसी) हटाने के बाद प्राप्त होने वाले साफ कच्चे दाने को ‘तण्डुल’ कहा जाता है।
- मुख्य अर्थ: बिना पका हुआ कच्चा चावल (Raw Rice)।
- विशेष अर्थ: आयुर्वेदिक ग्रंथों और यज्ञ-हवन की विधियों में ‘अक्षत’ (बिना टूटे हुए चावल के दाने) के लिए तण्डुल शब्द का ही प्रयोग किया जाता है।
🔄 पर्यायवाची शब्द (Synonyms)
इसके प्रमुख समानार्थी शब्द निम्नलिखित हैं:
- चावल
- अक्षत (पूजा में प्रयुक्त होने वाले अखंडित चावल)
- व्रीहि (धान या चावल)
- शालि
- कूट
🏺 धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व
- धार्मिक महत्व: सनातन धर्म में पूजा-पाठ, तिलक और देव-कार्यों में तण्डुल (अक्षत) का प्रयोग अनिवार्य माना गया है। इसे संपन्नता और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
- आयुर्वेद: आयुर्वेद में विभिन्न प्रकार के चावलों (जैसे लाल शालि चावल) के औषधीय गुणों का वर्णन करने के लिए ‘तण्डुल’ शब्द का प्रचुर मात्रा में उपयोग हुआ है।
⚖️ व्याकरणिक रूप (Sanskrit Grammar)
- लिंग: पुल्लिंग (Masculine)
- शब्द रूप: संस्कृत व्याकरण में यह ‘अकारान्त पुल्लिंग’ शब्द है। इसके रूप ‘राम’ या ‘बालक’ शब्द की तरह चलते हैं:
