नापित शब्द के रूप (Naapit Ke Shabd Roop) – संस्कृत

नापित शब्द (Naapit Shabd, नाई, नाऊ, हज्जाम): नापित शब्द के अकारान्त पुल्लिंग शब्द के शब्द रूप, नापित (Naapit) शब्द के अंत में “अ” का प्रयोग हुआ इसलिए यह अकारान्त हैं। अतः Naapit Shabd के Shabd Roop की तरह नापित जैसे सभी अकारान्त पुल्लिंग शब्दों के शब्द रूप (Shabd Roop) इसी प्रकार बनाते है। नापित शब्द के शब्द रूप संस्कृत में सभी विभक्तियों एवं तीनों वचन में शब्द रूप (Naapit Shabd Roop) नीचे दिये गये हैं।

नापित के शब्द रूप – Shabd Roop of Naapit

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथमा नापितः नापितौ नापिताः
द्वितीया नापितम् नापितौ नापितान्
तृतीया नापितेण नापिताभ्याम् नापितैः
चतुर्थी नापिताय नापिताभ्याम् नापितेभ्यः
पंचमी नापितात् नापिताभ्याम् नापितेभ्यः
षष्ठी नापितस्य नापितयोः नापिताणाम्
सप्तमी नापिते नापितयोः नापितेषु
सम्बोधन हे नापित ! हे नापितौ ! हे नापिताः !

नापित शब्द का अर्थ/मतलब

नापित शब्द का अर्थ नाई, नाऊ, हज्जाम होता है। नापित शब्द अकारान्त शब्द है।

नापित संज्ञा पुं॰ [सं॰] वह जो सिर के बाल मुँड़ने (या काटने), और नाखुन आदि काटने का काम करता हो । नाई । नाऊ । हज्जाम ।

विशेष—धर्मशास्त्र में नापित की गणना अच्छे शुद्रों में है ।

स्मृतियों में नापित संकर जाति के अंतर्गत माने गए हैं ।

पराशर स्मृति में लिखा है कि शुद्रा के गर्भ से ब्राह्मण द्धारा उत्पन्न संतान का यदि ब्राह्मण द्धारा संस्कार न हुआ हो तो वह नापित कहलाता है ।

पर परशुराम के अनुसार कुबेरी पुरुष और पट्टिकारी स्त्री के संयोग से नापितों की उत्पत्ति हुई ।

मनु ने नापितों की गिनती भोज्यान्न शुद्रों में की है ।

पर्या॰—क्षुरी । मुंडी । दिवाकीर्ति । अंत्यावसायी । सुत्री । नखकुट्ट । ग्रामीणी । चंद्रिल । भांडपुट ।

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