धूर्जटि शब्द के रूप – Dhoorjati Ke Shabd Roop – Sanskrit

धूर्जटि शब्द (Dhoorjati Shabd, शिव, महादेव): इकारांत पुल्लिंग शब्द, धूर्जटि- इस प्रकार के सभी इकारांत पुल्लिंग शब्दों के शब्द रूप (Shabd Roop) इसी प्रकार बनाते है। धूर्जटि के शब्द रूप इस प्रकार हैं-

धूर्जटि के शब्द रूप – Shabd Roop of Dhurjati

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथमा धूर्जटिः धूर्जटी धूर्जटयः
द्वितीया धूर्जटिम् धूर्जटी धूर्जटीन्
तृतीया धूर्जटिना धूर्जटिभ्याम् धूर्जटिभिः
चतुर्थी धूर्जटये धूर्जटिभ्याम् धूर्जटिभ्यः
पञ्चमी धूर्जटेः धूर्जटिभ्याम् धूर्जटिभ्यः
षष्ठी धूर्जटेः धूर्जट्योः धूर्जटीनाम्
सप्तमी धूर्जटौ धूर्जट्योः धूर्जटिषु
सम्बोधन हे धूर्जटे ! हे धूर्जटी ! हे धूर्जटयः !

📖 शब्द का संधि-विच्छेद और अर्थ (Meaning & Origin)

धूर्जटि (Dhoorjati) एक अत्यंत विशिष्ट संस्कृत मूल का संज्ञा शब्द है, जिसका मुख्य अर्थ ‘भगवान शिव’ या ‘महादेव’ होता है. यह शब्द शिव जी के स्वरूप और उनकी विशाल जटाओं की विशेषता को दर्शाता है.

यह शब्द दो संस्कृत शब्दों के मेल से बना है— धुर् + जटि:

  • धुर् / धूर: इसका अर्थ होता है ‘भारी बोझ’ या ‘भार’.
  • जटि: इसका अर्थ होता है ‘जटाजूट’ (बँधे हुए बाल).
  • शाब्दिक अर्थ: “जिन्होंने अपनी जटाओं पर भारी बोझ धारण किया हुआ है”. पौराणिक संदर्भ में, भगवान शिव ने स्वर्ग से तीव्र वेग से गिरती हुई नदी गंगा के भारी बोझ को अपनी जटाओं में समेट लिया था, इसीलिए उन्हें ‘धूर्जटि’ कहा जाता है.

🔄 पर्यायवाची शब्द

भगवान शिव के इस विशेष रूप के प्रमुख समानार्थी शब्द निम्नलिखित हैं:

  • कपर्दी: जटाजूट धारण करने वाले शिव.
  • गंगाधर: अपनी जटाओं में गंगा को रोकने वाले.
  • चंद्रशेखर: जिनके मस्तक पर चंद्रमा विराजमान है.
  • नीलकंठ: विषपान करने के कारण नीले कंठ वाले.
  • जटी: घनी जटाओं वाले.

🏺 साहित्यिक महत्व

संस्कृत और हिंदी साहित्य में शिव की स्तुति करते समय इस शब्द का बहुत प्रयोग होता है. कृष्णदेवराय के दरबार के प्रसिद्ध अष्टदिग्गज कवियों में से एक महान तेलुगु-संस्कृत कवि का नाम भी ‘धूर्जटि’ था, जो भगवान शिव के परम भक्त थे.

⚖️ व्याकरणिक रूप

  • लिंग: पुल्लिंग (Masculine).
  • लेखन: इसे मुख्य रूप से धूर्जटि (छोटी ‘इ’ की मात्रा) और कहीं-कहीं धूर्जटी (बड़ी ‘ई’ की मात्रा) भी लिखा जाता है.
  • शब्द रूप: संस्कृत व्याकरण में यह ‘इकारान्त पुल्लिंग’ शब्द है. इसके रूप ‘मुनि’ या ‘हरि’ शब्द की तरह चलते हैं.

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