अग्निमथ् शब्द (यज्ञ में अरणि का मंथन करनेवाला याज्ञिक ब्राह्मण): अग्निमथ् शब्द के थकारान्त पुल्लिंग शब्द के शब्द रूप, अग्निमथ् (Agnimath) शब्द के अंत में “थ्” की मात्रा का प्रयोग हुआ इसलिए यह थकारान्त हैं। अतः Agnimath Shabd के Shabd Roop की तरह अग्निमथ् जैसे सभी थकारान्त पुल्लिंग शब्दों के शब्द रूप (Shabd Roop) इसी प्रकार बनाते है। अग्निमथ् शब्द के शब्द रूप संस्कृत में सभी विभक्तियों एवं तीनों वचन में शब्द रूप (Agnimath Shabd Roop) नीचे दिये गये हैं।
अग्निमथ् के शब्द रूप – Shabd roop of Agnimath
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | अग्निमत्/ अग्निमद् | अग्निमथौ | अग्निमथः |
| द्वितीया | अग्निमथम् | अग्निमथौ | अग्निमथः |
| तृतीया | अग्निमथा | अग्निमद्भ्याम् | अग्निमद्भिः |
| चतुर्थी | अग्निमथे | अग्निमद्भ्याम् | अग्निमद्भ्यः |
| पंचमी | अग्निमथः | अग्निमद्भ्याम् | अग्निमद्भ्यः |
| षष्ठी | अग्निमथः | अग्निमथोः | अग्निमथाम् |
| सप्तमी | अग्निमथि | अग्निमथोः | अग्निमत्सु |
| सम्बोधन ! | अग्निमत्/ अग्निमद् ! | हे अग्निमथौ ! | हे अग्निमथः ! |
अग्निमथ् शब्द का अर्थ/मतलब
अग्निमथ् शब्द का अर्थ यज्ञ में अरणि का मंथन करनेवाला याज्ञिक ब्राह्मण, अरणिमंथन के अवसर पर प्रयुक्त होने वाले मेंत्र, अरणि का कांड [को॰] होता है। अग्निमथ् शब्द थकारान्त शब्द है इसका मतलब भी “यज्ञ में अरणि का मंथन करनेवाला याज्ञिक ब्राह्मण” होता है।
