कहानी – कहानी कैसे लिखे?

कहानी साहित्य की सबसे प्राचीन विधा है और समय-समय पर इसकी परिभाषा देने का प्रयत्न विद्वानों द्वारा किया जाता रहा है। इस विषय में प्रेमचंद का कथन है कि, “कहानी वह रचना है जिसमें जीवन के किसी एक अंग या किसी मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उददेश्य रहता है। उसके चरित्र, उसकी शैली, उसका कथा विन्यास उसी एक भाव की पुष्टि करते हैं। वह एक गमला है जिसमें एक पौधे का माधुर्य अपने समुन्नत रूप से दृष्टिगोचर होता है।”

महाकाव्य और उपन्यास के ही समान अच्छी कहानी के गुण, परिभाषा में नहीं बांधे जा सकते। फिर भी इसके कुछ तत्त्व विद्वानों ने निर्धारित किए हैं, जिनमें प्रमुख हैं- वस्तु, पात्र और वातावरण। (कहानी लेखक और कहानियाँ)

कहानी की कथावस्तु

कहानी की कथावस्तु में एकता और अन्विति का होना अनिवार्य है। इसमें विषयांतर और प्रासंगिक घटनाओं के लिए भी कोई स्थान नहीं होता। कहानी में कथानक आत्मसंघर्ष की स्थिति से गुजरता हुआ उत्थान (समृद्धि और तीव्र दुविधा) को प्राप्त कर चरम सीमा पर पहुँचता है। प्रायः कहानियाँ यही समाप्त हो जाती हैं। परन्तु कुछ लेखक कहानियों में अवरोध और उपसंहार भी नियोजित करते हैं।

कहानी के पात्र

उपन्यास के समान कहानी के पात्रों को भी सजीव, सहज और स्वाभाविक होना आवश्यक है और इसमें पात्रों के चरित्रोद्घाटन के लिए प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों विधियों का आश्रय लिया जा सकता है।

भौतिक वातावरण के लिए तो कहानी में पर्याप्त अवकाश नहीं होता, पर मानसिक वातावरण उसका अनिवार्य तत्त्व होता है। इसके संवाद भी देशकाल और परिस्थितियों के अनुरूप तो होने चाहिए, साथ ही उनमें सरलता, संक्षिप्तता और कथानक को गति देने के गुण का होना भी अनिवार्य है।

भाषा सरल तथा पात्रानुकूल हो तथा शैली भावपूर्ण, वर्णनात्मक, डायरी, आत्मकथन आदि किसी भी प्रकार की हो सकती है। कहानियों को प्रायः सैद्धान्तिक, ऐतिहासिक, सुधारात्मक, मनोवैज्ञानिक, आंचलिक आदि वर्गों में रखा जाता है।

कहानी लेखक और कहानियाँ

यों तो हिन्दी साहित्य में कहानियाँ बहुत समय से मिलती हैं, परन्तु आधुनिक ढंग की कहानी (शार्ट स्टोरी) का प्रारंभ सरस्वती में सन् 1900 में प्रकाशित किशोरी लाल गोस्वामी की इन्दुमती से स्वीकार किया जाता है। अन्य प्रारम्भिक कहानियों में “ग्यारह वर्ष का समय (रामचंद्र शुक्ल) तथा दुलाई वाली (बंग महिला) की पर्याप्त चर्चा हुई है।

हिन्दी कहानी साहित्य को सर्वाधिक समृद्ध किया मुंशी प्रेमचंद ने, इन्होंने पंचपरमेश्वर, शतरंज के खिलाड़ी, कफन आदि 300 से अधिक कहानियाँ लिखी। अन्य कहानीकारों में प्रमुख हैं-जयशंकर प्रसाद, जैनेन्द्र, अज्ञेय, यशपाल, इलाचन्द्र जोशी, धर्मवीर भारती, कमलेश्वर, राजेन्द्र यादव, मोहन राकेश, निर्मल वर्मा, मन्न भंडारी, फणीश्वरनाथ रेणु, कृष्णा सोबती, शिवानी, उषा प्रियवंदा, ज्ञानरंजन, गोविन्द मिश्र आदि।

हिन्दी साहित्य की अन्य विधाएँ

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