इंटरनेट पर क्या करना चाहिए और क्या चीज नहीं?

Internet Par Kya Karna Chahiye Aur Kya Nahi
Internet Par Kya Karna Chahiye Aur Kya Nahi

आज के समय में इंटरनेट की दुनिया बहुत बड़ी दुनिया है और इसके अंदर बहुत सारे काम होते हैं जो लीगल होते हैं गैर कानूनी होते हैं, ठीक है लेकिन अब आप पूछ रहे हो कि कौन सी चीज जो हमें इंटरनेट पर नहीं करनी चाहिए मेरे भाई चीजें बहुत है।

हर चीज के दो पहलू होते हैं पॉजिटिव और नेगेटिव ये आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप कौन सा पहलू लेते हो-

अगर आप पॉजिटिव पक्ष लेते हो तो आपकी लाइफ चेंज हो जाएगी आप एक सक्सेस तरफ जा रहे होंगे आप बहुत अच्छा करेंगे अपनी लाइफ में।

अगर आप नेगेटिव पॉइंट लेते हो तो हां उसमें आप पैसा कमाओ गे और एक समय के लिए तो आपको लगेगा कि रास्ते में था लेकिन फिर धीरे-धीरे उस रास्ते से सब कुछ बंद हो जाएगा पैसा भी बंद हो जाएगा सपोर्ट भी बंद हो जाएगा और उल्टा आपको आपके जीवन तक का खतरा रहेगा कि आप अभी जिंदा है लेकिन मर गए तो।

इसीलिए मेरे भाई इंटरनेट पर कोई भी गैरकानूनी काम मत करो क्योंकि गैरकानूनी काम करोगे तो आज नहीं तो कल पकड़े जाने हो अब गैरकानूनी में आप क्या चीज आती है।

  1. गूगल पर कभी भी हॉट keywords नहीं सर्च करने चाहिए जैसे की बोम, ब्लास्ट, मर्डर, किल, आदि क्योकि इन हॉट केयवोर्ड्स की हर वक़्त निगरानी की जाती है और आप कभी फंस सकते है।
  2. कभी भी अन नोन वाई-फ़ाई से कनेक्ट होकर अपने पर्सनल और गुप्त id को लॉगिन नहीं करना चाहिए, और ऑनलाइन ट्रानजैकशन तो भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
  3. किसी और के पीसी / मोबाइल में अगर आप लॉगिन करते है तो कभी भी गलती से सेव पासवर्ड पर क्लिक नहीं करना चाहिए।
  4. किसी भी वैबसाइट पर अपने क्रेडिट/डेबिट कार्ड की डिटेल्स नहीं शेयर करनी चाहिए।
  5. कभी भी किसी भी असुरक्षित ऐप से अपने फेसबुक को कनेक्ट न करें।
  6. ऑटो लाइकर के प्रयोग से बचना चाहिए, क्योकि जब आप औटोलाइकर ऑन करते है तो वो आप उन्हें आज्ञा दे देते है की वो आपके id के साथ कुछ भी करें, यहाँ तक की आपके मेसेज तक पढ़ने की अनुमति दे देते है।
  7. मोबाइल में ऐप्स को इन्स्टाल करते वक़्त उन्हें देने वाली परमिशन को सावधानी पूर्वक देख कर ही अग्री अँड कंटिन्यू पर क्लिक करना चाहिए।
  8. कभी भी डार्क वेब ऐक्सेस करने का प्रयास न करें।
  9. बोम्ब, ब्लास्ट, अटैक जैसे शब्दों का प्रयोग करके सर्च नहीं करना चाहिए।
  10. हर वेबसाइट की कुकीज़ स्वीकृत नहीं करनी चाहिए
  11. अपने क्रेडिट कार्ड की जानकारी असुरक्षित जगहों पर शेयर नही करनी चाहिए
  12. अपनी लोकेशन हर किसी app और वेबसाइट को नहीं access करने देना है।
  13. फेसबुक install नहीं किया तो हमारा डेटा सुरक्षित है यह गलत धारणा नहीं पालनी चाहिए।
  14. LOL , Nametest जैसे app को फेसबुक का लॉगिन दे कर अपनी प्राइवेसी को खतरा मत होने दीजिए।
  15. सबसे जरूरी बात, हर app को install करते वक़्त सिर्फ़ वहीं permission दीजिए जो उसके लिए जरूरी हो।
  16. डार्क वेब से दूर रहें। डीप वेब में सोच समझ कर काम कीजिए।

लिस्ट काफी लंबी है, साधरण परिस्थितियों में यह काफी है। अधिक जानकारी आपको यूट्यूब पे मिल जाएगी।

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क्या इंटरनेट जरूरत है या फिर आदत?

internet jarurat ya adat
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कभी जरूरत और कभी आदत: जब इंटरनेट का आविष्कार हुआ तो निश्चित ही इसकी जरूरत महसूस की गई होगी और जो भी लोग इससे जुड़े वे इसकी जरूरत समझकर ही जुड़े । मैं भी उनमें से ही एक हूं। किंतु जैसे जैसे इंटरनेट के मोहपाश में बंधता गया, नए-नए आकर्षणों में घिरता रहा, वैसे वैसे यह मेरी आदत बन गई।

आज के दिन बिना इंटरनेट के जीवन असम्भव है- ईमेल, सोशल नेटवर्किंग, गूगल पे जानकारी, जीपीएस, गूगल मैप्स, यूट्यूब, कुओरा, आय कर रिटर्न, GST रिटर्न, हवाई टिकट, रेल टिकट, होटल बुकिंग, ऑनलाइन शॉपिंग, नेट बैंकिंग आदि।

अभी तो दसवां भाग भी पूरा नहीं हुआ। कैसे काम चल सकता है इंटरनेट के बिना। इसने जीवन इतना सुगम बना दिया है। यदि आपका काम घर बैठे हो जाये तो क्या आप बैंक, दफ्तर आदि फिर भी जायेंगे।

इंटरनेट आज की ज़रूरत हैं, और ये जररूत अब आदत में बदल चुकी हैं, इंटरनेट ज़रूरत और आदत का एक ऐसा संगम हैं, जिसका हम सब रोज़ उपयोग करते हैं, मात्रा चाहे अलग हो सकती हैं। चलिए समझते हैं कैसे इंटरनेट ज़रूरत और आदत का संगम हैं।

मेरी बात करूँ तो इंटरनेट ने मुझे वो करने की आज़ादी दी हैं, जो मैं ज़िन्दगी भर करना चाहता था, और वो था खुद को एक सॉफ्टवेयर डेवलपर को रूप में देखना, आज इंटरनेट के माध्यम से मैं घर बैठे वो सब सीख रहा हूँ, जो मुझे बाहर किसी इंस्टिट्यूट में जाकर सीखना पड़ता, तो इस तरह इंटरनेट ने मेरे काफी पैसे को भी बचाया हैं, और समय को भी।

आज इंटरनेट के उपयोग की परिभाषा बदल ही चुकी हैं, मैंने देखा हैं मेरे दोस्तों को जो इंटरनेट की सहायता से अध्ययन संबंधित वीडियोस को देख कर अपना ज्ञान बढ़ा रहे हैं, आज बहुत से विद्यार्थियों के लिए इंटरनेट एक वरदान कहूंगा तो गलत नही होगा, क्योंकि इंटरनेट हमें सुविधा देता हैं वो सब कुछ सीखने का जो हम सीखना चाहते है।

  • अपने कम्फर्ट लेवल पर, घर पर बैठे-बैठे।
  • हम चाहे तो सुबह जल्दी उठकर पढ़ सकते है, या रात्रि में।
  • हमें एक अध्यापक नहीं, लाखों अध्यापक मिल जाएंगे।
  • कहीं पर पहुँचने और वहाँ से आने पर लगने वाले समय की बचत हो जाती है।
  • संसाधनों की तो मात्रा बहुतायत हैं।
  • सबसे अच्छी बात हैं आप रविवार को और त्यौहारों पर भी पढ़ाई कर सकते हैं।

इस तरह इंटरनेट हमें हमारे भविष्य सँवारने के लिए प्रचुर मात्रा में संसाधन देता हैं, और अच्छा भविष्य हम सभी की ज़रूरत हैं, और इस ज़रुरत को इंटरनेट पूरा कर रहा हैं, इस तरह इंटरनेट एक ज़रूरत हैं।

इंटरनेट को मैं एक आदत के रूप में इस प्रकार परिभाषित करना चाहूँगा, मान लीजिए आज आपको पढ़ने का या कुछ नया सीखने का मन नहीं हैं, या आपने आज जो जितनी मात्रा में सीखना था सीख लिया, इसका मतलब आपने अपने भविष्य को सँवारने के लिए जितने इंटरनेट की ज़रूरत आज के दिन ज़रूरत थी उसकी पूर्ति कर ली, तो क्या अब आप इंटरनेट का उपयोग ही नहीं करेंगे पूरे दिन?

नहीं आप इंटरनेट का उपयोग जारी रखेंगें, आप अब अपना मनोरंजन कर सकते हैं, सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर अपने मित्रों से बात कर सकते हैं इत्यादि।

इसका मतलब ये हैं कि आप ज़रूरत के अतिरिक्त जितने भी इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं, वो आपकी आदत के अंतर्गत आता हैं, आप तो अपना मनोरंजन टेलीविजन देख कर भी कर सकते हैं, लेकिन आप वो नहीं देखेंगे, और अगर देखेंगे भी तब भी आपकी आंखें आपके मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर पर अधिक होगी।

ये वो आपकी आदत हैं इंटरनेट का उपयोग करने की जो आपको इंटरनेट से दूर रहने नहीं देती। पहले जब इंटरनेट की कीमतें काफी ज्यादा थी, तब हम इंटरनेट का उपयोग अपनी जरूरत के अनुसार करते थे, लेकिन जैसे ही इंटरनेट की कीमतें कम हुई आज हमारी आंखे थककर बंद हो जाती हैं, लेकिन इंटरनेट चालू रहता हैं, इस तरह इंटरनेट हमारी आदत में भी शुमार हो गया हैं अब।

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वीपीएन (VPN) क्या होता है? क्या यह गैर कानूनी है?

VPN
VPN

वीपीएन का अर्थ है वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क। यह एक तरह का सॉफ्टवेयर है जो मोबाइल व कंप्यूटर दोनो में इंस्टाल किया जा सकता है।

वीपीएन (VPN)

बीपीएन एक इंटरफ़ेस के तरह काम करता है तो आपके सिस्टम के होस्ट सर्वर को कोई भी साईट के सर्वर से जोड़ सकता है। यह एक प्राईवेट नेटवर्क है पब्लिक नेटवर्क उपयोग कर के रिमोट साइट्स से उपयोगकर्ता से जोड़ता है।

जब हम मोबाइल से कोई कीवर्ड सर्च करते है तो उसकी रिक्वेस्ट हमारे आईएसपी(इनटरनेट सर्विस प्रोवाइडर) जैसे जिओ, एयरटेल, वोडाफोन आदि के पास जाती है। फिर वो हमे आगे उस कीवर्ड के रिजल्ट से जोड़ते है। कई बार हमारे आईएसपी द्वारा या सरकार द्वारा कुछ वेबसाइट को ब्लॉक कर दिया जाता है। ताकि हम उसे नही देख पाए। तब हम वीपीएन का प्रयोग कर उन वेबसाइट को देख सकते है।

जब हम वीपीएन के माध्यम से कोई प्रतिबंधित सामग्री सर्च करते है तो वीपीएन हमे सीधा अपने सर्वर से जो कि किसी और देश जैसे फ़्रांस, रूस या अमेरिका में है उससे जोड़ता है। हमारे आईएसपी को लगता है कि आप सिर्फ किसी अन्य देश के सर्वर से जुड़ना चाहते हो।

वीपीएन हमारा ढूढ़ा जाने वाला कीवर्ड को एन्क्रिप्ट कर पैकेटस में बांट देता है। जिसे आईएसपी इसे नही पढ़ पता और वो हमें वीपीएन के सर्वर से जोड़ देता है।

अब जो चीज़ यहाँ प्रतिबंधत है वो अमेरिका या रूस में नही। तो वो सामग्री हम देख सकते या डाऊनलोड कर सकते है। अब जब सर्वर आपको सर्च किये सामग्री का रिजल्ट दिखा रहा है तो हमारे आईएसपी को यही लगता है कि आप सिर्फ एक ही सर्वर पर काम कर रहे हो।

हैकर्स इसी का इस्तेमाल बडे रूप में करते है वो एक साथ कई सर्वर का इस्तेमाल करते है ताकि उनकी लोकेशन लगातार बदलती रहे। जैसा कि हम टोर प्रोजेक्ट में देखते है।

इंटरफेस क्या है ?

मतलब आप और इंटरनेट के बीच में जो एक माध्यम बना, यहां उसे इंटरफेस कहा जाता है। फिर सवाल आएगा कि जावा जैसे प्रोग्राम तो पहले से ही इंटरफ़ेस उपयोग करते हैं, फिर वीपीएन क्या अधिक किया।

तो यहां समझना पड़ेगा, जावा इंटरफ़ेस प्रोग्रामिंग के लिए और कॉड बनाने के लिए है। आप को आउटपुट( सूचना) अंत में क्या मिलेगा और वो जिस नेटवर्क से आयेगा उसकी सूचना कैसे जतायत करेगा उस पर प्रोग्रामिंग इंटरफेस का कोई अधिकार नहीं रहता। तो बीपीएन एक ऐसा वर्चुअल निजी नेटवर्क तयार करता है जो सुरक्षित रूप से बाहरी साइटों को आपके सिस्टम तक पहुंचाता और उसे हैकर आदि से बचाए रखता है।

इस लिए बीपीएन को कहा जाता है (virtual private network)।

अब प्रश्न के दूसरे भाग में आते हैं। क्या भारत में बीपीएन गैर कानूनी है?

नहीं। भारत में बीपीएन गैर कानूनी नहीं है, बैध है।

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इंटरनेट से पैसे कमाने के तरीके कौन से हैं? विश्वसनीय तरीके

हम सभी जानते है की पैसा हमारे जीवन के लिए कितना जरूरी है, हर कोई पैसा कमाना चाहता है क्योंकि बिना पैसे के हम अपनी जरूरतों पूरा नहीं कर सकते है। इंटरनेट से पैसा कमाया जा सकता है और आप इस तरीके से इंटरनेट से पैसे सकते हो।

Internet Se Paise Kamane Ke Tareeke
Internet Se Paise Kamane Ke Tareeke

अगर आप भी बेरोजगार है और घर बैठे पैसे कमाना चाहते है तो हम आपको हमारी इस पोस्ट में ऑनलाइन Paisa Kamane Ka Tarika Hindi Me बताने जा रहे है।

आज इंटरनेट का विस्तार इतना हो चूका है की कई सारे काम इंटरनेट के माध्यम से ही किये जाते है। आप भी इंटरनेट का Use कर रहे होंगे और आपने कई लोगो से सुना होगा की Internet Se Paise Kaise Kamaye इस तरीके की जरूरत खास करके उन लोगो को होती है जो स्टूडेंट, हाउस वाइफ या फिर जो घर पर बेरोजगार बैठे होते है।

इन्टरनेट के माध्यम से ऑनलाइन पैसा कमाना इतना आसान नहीं है लेकिन मुश्किल भी नहीं है बशर्ते आप मेहनत कर रहे हो। इन्टरनेट के माध्यम से पैसे कमाने के उन तरीकों के बारे में बात करेंगे जो पॉपुलर है और जिनके जरिये बहुत से लोग ऑनलाइन पैसा कमा रहे है।

1. Blogging

ब्लॉगिंग online earning के रूप में काफी लोकप्रिय है। ब्लॉगिंग में सफलता जल्द नहीं मिलती है लेकिन अगर आप मन लगाकर लगातार काम करते है तो निश्चित रूप से ब्लॉगिंग में पैसा कमाया जा सकता है।

ब्लॉगिंग से पैसा कमाने के लिए इस पर ट्रैफिक होना जरूरी है।

2. YouTube

हम में से अधिकतर लोग यूट्यूब को सिर्फ मनोरंजन के लिए उपयोग करते है लेकिन इसकी सहायता से ऑनलाइन पैसा कमाया जा सकता है।

यूट्यूब से earning करने के लिए चैनल बनाना होता है और उस पर ऐसे विडियोज अपलोड करने होते है जिन्हें ऑडियंस देखना चाहती है।

जब यूट्यूब चैनल पर 1,000 subscribers तथा 4,000 घंटों का WatchTime पूरा हो जायें तो गूगल एडसेंस से मोनेटाइज कर अर्निंग कर सकते है।

3. Affiliate Marketing

अगर आपके यूट्यूब चैनल पर अच्छे views है या ब्लॉगिंग में ब्लॉग पर अच्छा ट्रेफिक है तो एफिलिएट मार्केटिंग से बहुत बढ़िया अर्निंग की जा सकती है।

4. E-Book

अगर आपको लिखना अच्छा लगता है यानि आप अपनी राइटिंग से रीडर्स का मन जीत सकते है तो e-book लिखना आपके लिए एक विकल्प है जिससे आप ऑनलाइन पैसा कमा सकते है। Amazon Kindle जैसे प्लेटफार्म पर ई-बुक्स पब्लिश करते है।

5. Free lancing websites

ये ऐसी websites होती हैं जिसपर बहुत तरह के प्रोजेक्ट होते हैं जैसे की data entry , सर्वे और भी बहुत प्रकार से काम करके 5 से 10 हज़ार रूपए कमाए जा सकते हैं आप के काम की कुछ websites मैं आओ के साथ शेयर कर रहा हूँ जैसे- ‘freelancer.com, upwork.com, Fiverr.com‘ ये सभी freelancer साइट्स हैं यहाँ आप अकाउंट बना कर पैसे कम सकते हैं।

हमारी ऐसी कई जरूरते होती है जिसे पूरा करने के लिए हम इंटरनेट का सहारा लेते है। इंटरनेट सांख्यकी स्त्रोत के अनुसार वर्ष २०१६ में ३.५ अरब से ज्यादा लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करने लगे है। और यह संख्या दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है।

एक ऑनलाइन बिज़नेस ब्लॉग पर दी गयी जानकारी के अनुसार दो तरह के लोग इंटरनेट इस्तेमाल करते है , एक जो अपने जरूरतों को पूरा करने के लिए या किसी समस्या का हल खोजने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करते है और दूसरे वह जो पहले वाले लोगो के जरूरतों को पूरा कर पैसा कमाते है।

6. Translator बन कर

अगर आपको दो या दो से ज्यादा भाषा का ज्ञान है तो यह आपके लिए अच्छा आप्शन हैं। इसमें आपको एक भाषा को दूसरी भाषा में बदलना होता हैं आप भारत की लोकल भाषाओं में भी कम कर सकते हैं जैसे तमिल से हिंदी , बंगला से तमिल ऐसी बहुत सारी भाषाओं में काम कर सकते हैं। यह सभी option आपको freelancer websites पर मिल सकता है।

7. Online tution

यदि आप टीचिंग के क्षेत्र में अनुभव रखते हैं तो यह आप के लिए अच्छा प्लेटफार्म है जहाँ आप बच्चों को online कोचिंग करके पैसे कमा सकते हैं। इसके लिए आपको कुछ साइट्स पर अकाउंट बनाना होगा और उसके बाद आपको TUITION पढ़ाना होगा और आपको इसके बदले पैसे मिलेंगे।

अगर आप एक छात्र या पुरुष या महिला और दुनिया के किसी भी हिस्से में रहने वाले व्यक्ति हैं और घर से पैसा कमाना चाहते हैं तो ऐसे बहुत से तरीके हैं जिनके द्वारा आप ऑनलाइन पैसे कमा सकते हैं।

8. नेटवर्क मार्केटिंग

क्या आपने नेटवर्क मार्केटिंग के बारे में सुना है … अगर नहीं तो पढ़ते रहिए… नेटवर्क मार्केटिंग सबसे अच्छी भुगतान करने वाली मार्केटिंग तकनीक में से एक है, जिसके लिए कोई डिग्री की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए सभी लोगों की एक श्रृंखला (नेटवर्क) बनाने का प्रयास है।

और यह एक विशेष स्तर पर पहुंचने के बाद सबसे अच्छा निष्क्रिय आय जनरेटर में से एक है।

लेकिन अब इंटरनेट इन नौकरियों से भरा है और यहां वास्तविक काम खोजने के लिए अब मुश्किल हो गया है।
लेकिन आज मैं आपको एक ऐसा तरीका बताने जा रहा हूँ जिसके द्वारा आप सिर्फ एक नेटवर्क से जुड़कर और बिना किसी ज्वाइनिंग फीस के सिर्फ और सिर्फ नेटवर्क का विस्तार करके और गेम खेलकर ऑनलाइन पैसा कमा सकते हैं।

  • जिस चीज़ की ज़रूरत है वह है: एक स्मार्टफोन और इंटरनेट

आप अपने खाते में तत्काल भुगतान प्राप्त करेंगे और मुझे विश्वास है कि दोस्तों यह कुछ ऐसा है जहाँ आप प्रति माह लाखों कमा सकते हैं।

इसके अलावा भी कई तरीक़े है जिनकी सहायता से ऑनलाइन पैसा कमाया जा सकता है जैसे कि ऑनलाइन surveys, कटेंट राइटिंग इत्यादि।

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वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web- WWW) और इंटरनेट के बीच क्या अंतर होता है?

WWW व Internet में अंतर
WWW व Internet में अंतर

WWW एक सॉफ्टवेयर है जो internet चलाने में मदद करता है। वही इंटरनेट दो शब्दों से बना है, inter net से मिल कर बना है। Internet कई कंप्यूटर का जाल है जो आपस मे एक दूसरे से जुड़े हुए है। ये एक तरह से हार्डवेयर है जिसे सॉफ्टवेयर की मदद से संचालित किया जाता है। World Wide Web नेटवर्क के द्वारा एक्सेस किया जा सकने वाला जानकारी का भण्डार है और मानव ज्ञान की अभीव्यक्ति है।

WWW व Internet में अंतर

  1. WWW और इन्टरनेट एक दूसरे से संबंधित दो भिन्न भिन्न चीज़े हैं।
  2. इन्टरनेट एक वृहद नेटवर्क है जबकि WWW उस नेटवर्क के माध्यम से एक्सेस किया जाने वाला सूचना व संसाधन संग्रह।
  3. इन्टरनेट बहुत सारे कम्प्यूटर व नेटवर्क डिवाइसों का समूह नेटवर्क हैं जबकि WWW बहुत सारी वेबसाइटों का समूह।

इसे web भी कहा जाता है। WWW पूरी दुनिया से जुड़े नेटवर्क से जुड़ा एक सूचना संग्रह (Information Space) होता हैं, जहां इंटरनेट में उपलब्ध डॉक्युमेंटस, सूचनाएं, संसाधन (Resources) आदि संग्रहित होते हैं। तथा इन डॉक्युमेंटस, सूचनाएं, संसाधन (Resources) आदि को एक विशिष्ट एड्रेस प्रदान किया जाता है, इस विशेसब एड्रेस को URL (Uniform Resource Locator) कहते हैं। उदाहरण: www. abcd. com में abcd. com यूआरएल हैं।

WWW में संग्रहित सूचनाएं एवं संसाधन URL व http (Hyper Text Transfer Protocal) की सहायता से इंटरनेट से एक्सेस किया जाता हैं।

इंटरनेशनल नेटवर्किंग (International Networking) को संक्षिप्त में (इंटरनेट) Internet कहा जाता है। अर्थात इन्टरनेट नेटवर्कों का नेटवर्क है, जो कि दुनिया के किसी भी हिस्से से इस नेटवर्क में जुड़ने वाले कम्प्यूटर या डिवाइस को पुरे विश्व से जोड़ता हैं। या यह एक दूसरे से आपस में जुड़े कम्प्यूटर नेटवर्कों की भू-मंडलीय संरचना हैं। इस नेटवर्क में सूचनाओं और संसाधनों के डाटा को पैकेट के रूप में तैयार कर आदान प्रदान हेतु TCP/IP (Transmission Control Protocol/Internet Protocol) प्रोटोकॉल का का उपयोग किया जाता है।

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इंटरनेट का मालिक कौन है?

कोई भी नही। बस जो कंपनिया अपना पैसा लगाकर समुद्र तल पर ओएफ़सी OFC तारे बिछाती व उसका मरम्मत का काम करती है उसे हमारी टेलीकॉम कंपनिया पैसा देती है और हम सेवा के लिए इन टेलीकॉम कॉम्पनियोंको पैसा देते हैं।

Internet Ka Maalik
Internet Ka Maalik

सोचिए इसका मालिकाना हक अगर किसी व्यक्ति या देश के पास होता तो वह देश कितना माला-माल हो जाता. लेकिन सच यह है कि इंटरनेट का कोई एक मालिक नहीं है।

इंटरनेट की उत्पत्ति और उसमें रोज़ाना होने वाले इनोवेशनों के लिए सरकारों से लेकर निजी क्षेत्र, इंजीनियर्स, सिविल सोसाइटी के लोगों के अलावा और भी कई क्षेत्रों का सहयोग है।

पर स्थिति तब चिंताजनक हो जाती है जब इंटरनेट पर प्रत्यक्ष या परोक्ष नियंत्रण रखने की बात की जाए ।

अमेरिका का दबदबा है इंटरनेट पर…

कुछ बहुत बड़ी-बड़ी कंपनीयां है जो की अमेरिका में स्थित है, जैसे की आप जानते होंगे की एलेक्सा और अमेज़न जैसी वेबसाइट भी अमेरिका की ही है. इसीलिए ही अमेरिका इस इंटरनेट की दुनिया पर अपना दबदबा डालता है ऐसा माना जा सकता है.

हाल के समय ने इंटरनेट को एक ही अधिकारिक स्थिति में लाने के लिए और बचाने के लिए संयुक्तराष्ट्र के अंतर्गत कोई लोकतांत्रिक व्यवस्था में लाने के लिए कोशिश कर रहे है. इसके लिए कई देश ऐसा चाह रहे है की इंटरनेट गवर्नेस की एक अलग ही अपनी व्यवस्था बने जिसके द्वारा इंटरनेट को सरकार के नियंत्रण के निचे रखा जा सके।

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4G और 5G इंटरनेट स्पीड में कितना अंतर होगा?

4G Aur 5G Internet Speed Mein Antar
4G Aur 5G Internet Speed Mein Antar

वैसे तो कहा जाता है कि 5G ,4G से 10 गुना तेज होगा। लेकिन भारत मैं 3G और 4G की स्पीड एक जैसी ही होती है। अब इस बारे में अभी से तो क्या कह सकते है, आपको पता है ये इण्डिया है और यहाँ हर चीज़ नंबर वन होती है जैसा की आप टीवी विज्ञापन में देखते ही होंगे। खेर अब मुद्दे पर आते है की स्पीड क्या होगी।

  • 4G speed: 40–100Mbps
  • 5G speed(testing by company): 1Gbps
  • So approx 10× times better internet speed

4G और 5G इंटरनेट स्पीड में अंतर

जब जिओ ने 4G service इंडिया में लांच की तब उसकी स्पीड कितनी थी और आज कितनी है. जहा तक मैं जनता हूँ जब जिओ को मैंने फर्स्ट टाइम Use किया लगभग और लगातार 3 महीनो तक मुझे लगभर 2–3 MB की स्पीड मिलती थी वो भी दिन में और आज क्या हाल है आपको पता ही होगा।

आज मुस्किल से 100–250 KB तक की स्पीड मिलती है, तो जहा तक में मानता हूँ ऐसा ही हाल कुछ 5G का भी होगा हो सकता है थोड़ी बहुत जायदा मिल जाये पर आप वो accept नहीं कर सकते जो आप सोच रहे हो या जो दुसरे देशो में देखने को मिल जाये. हाँ बस एक फायदा है Data Cost बहुत कम हो गया है।

मुझे जब भी को बड़ी फाइल डाउनलोड करनी हो या अपना लेपटोप अपडेट करना हो तो आज उसके लिए में सुबह 4.30 के आस पास उठता हूँ और अपना काम करता हूँ क्यंकि उस वक़्त मुझे पहले वाली स्पीड मिल जाती है।

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Surface web, Deep web और Dark web तीनों में क्या अंतर है

Internet का नाम आते ही हमारे मन एक रूप आ जाता जिसे Google, Facebook, Instagram और अन्य अनगिनत चीज़े आ जाती है जिसे हर कोई खोल (Access) कर सकता है, लेकिन इंटरनेट यही तक सिमित नहीं है। Internet में एक दुनिया और बसी है, जिसे हर व्यक्ति नहीं जनता है इसका नाम है Dark Web और Deep Web।

Surface Web, Deep Web, Dark Web
Surface Web, Deep Web, Dark Web

अगर आपको लगता है की आप internet के विषय में सब कुछ जानते हैं, तो आप गलत सोच रहे है आपको शायद ये जानकर shock लग जाये की आप इंटरनेट Google,Facebook,Instagram,Gmail और Whatsapp तक ही नहीं है इन सब चीज़ो के पीछे इंटरनेट का एक विशाल रूप छुपा हुआ है और ये सब जोकि आप जानते है केवल ये पुरे Internet का 4-5% ही भाग है। इंटरनेट की काली दुनिया बहुत बड़ी है जिसे जानकर आप दंग रह जायेगे।

हाँ Google, Yahoo या कोई दूसरा search engine सभी केवल 4% तक ही cover करते हैं पूरी web world की. और वहीँ बाकि की 96% की web के बारे में हमें सच में कुछ भी नहीं पता और ये एक आम इन्सान के पहुँच से भी परे होता है, इंटरनेट के इसी हिस्से को ही डीप वेब और डार्क वेब कहते है।

Surface web

Surface web यहां वह वेब होती है, हम इस्तेमाल करते हैं। जिनका हम अपने दैनिक जीवन में इंटरनेट चलाने में उपयोग करते हैं।जैसे कि गूगल क्रोम कोई भी वेबसाइट हो जिसे हम अपने मोबाइल या कंप्यूटर में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं। और उस पर कोई भी जानकारियां काम किया जा सकता है। उसे सरफेस वेब कहते हैं। Surface वेब इंटरनेट का मात्र 5% कहीं भाग है। जिसे हम इस्तेमाल करते हैं। बाकी 95 परसेंट डीप वेब और डार्क वेब होते हैं जिन्हें हमें इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती है।

Deep web

डीप वेब यह वेबसाइट को हम सभी व्यक्ति नहीं चला सकते। इस वेबसाइट का इस्तेमाल कोई विशेष जानकारी या डाटा को एक से दूसरे जगह भेजने या संग्रहित करने में की जाती है। और इसे हर व्यक्ति इस वेबसाइट पर नहीं जा सकता वेबसाइट में जाने के लिए आईडी पासवर्ड जरूरत पड़ती है। इसका उपयोग किसी भी की देश की सीक्रेट जानकारी या डाटा, file को एक से दूसरी जगह भेज दिया संग्रहित की जाती है। यदि कोई हमें इस वेबसाइट का लिंक भेजता है तो हम इसके जरिए तो बहुत सकते हैं लेकिन बिना आईडी और पासवर्ड कि इसमें हम प्रवेश नहीं कर सकते। जैसे इसके उदाहरण हैं किसी बैंक, पेटीएम अकाउंट, पेपल अकाउंट और भी बहुत सारी सीक्रेट वेबसाइट जिससे आप आईडी और पासवर्ड क्यों नहीं कर सकते।

Dark web

डार्क वेब इस वेबसाइट को पहले किसी विशेष जानकारी की सुरक्षा के लिए बनाया गया था। लेकिन अब इस वेबसाइट का उपयोग गैरकानूनी कामों के लिए लोग करते हैं। जैसे किसी गैर कानूनी काम इस वेबसाइट में लेन-देन हो या कोई भी चीज इसी वेबसाइट के द्वारा किया जाता है। यह वेबसाइट बहुत बड़ी होती है। इसको भी चलाने के लिए विशेष ब्राउज़र की जरूरत पड़ती है। आज भी एक विशेष VPN की जरूरत पड़ती है। इस वेबसाइट की मदद से लोग बहुत बड़ी हैकिंग कर देते हैं। और लाखों लूट लेते हैं। इसके अलावा और भी बहुत सारी गैरकानूनी काम इस वेबसाइट के द्वारा किए जाते हैं। इस इस वेबसाइट को ऑपरेट करने वाला व्यक्ति को पकड़ना मुश्किल होता है। नामुमकिन के बराबर होता है लगभग। इसको किसी लिंक द्वारा भी इस वेबसाइट को नहीं खोला जा सकता है। और इस वेबसाइट को यदि हम गूगल पर भी सर्च करते हैं तो इसके परिणाम हमें नहीं देखेंगे।

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इंटरनेट पर सच और असल जीवन के सच में क्या अंतर है

भारत मैं इंटरनेट का इस्तेमाल हर कोई कर रहा हैं। जैसे ऑनलाइन पेमेंट करना, लाइट बिल, और मोबाइल रीचार्ज करना इत्यादि, आने वाले कुछ साल मैं Education System भी पूरी तरह इंटरनेट पर निर्भर हो जाएगा।

इंटरनेट सूचनाओं का विश्वकोश है। यह और कुछ नहीं बस बहुत सारे डिजिटल पन्नों की पुस्तक है। जिसके हर पेज को किसी न किसी व्यक्ति द्वारा द्वारा लिखा जाता है।

इंटरनेट की पहुंच दुनिया के अधिसंख्य लोगों तक हो चुकी है। जिनकी लिखी या कही बात एक से दूसरे के पास होते हुये लोगों तक पहुंच जाती है। अब यह लिखी या कही बात कितनी विश्वसनीय है यह उस सूचना के मूल लेखक या कहने वाले की विश्वसनीयता पर निर्भर करता है।

बिलकुल कागज की पुस्तकों की तरह ही इंटरनेट के लेखक की विश्वसनीयता ही उसकी पुस्तक को विश्वसनीय बनाती है। इसलिये जहां सभी लोगों की बातें सच हों यह जरूरी नहीं। वहीं सभी गलत हों यह कहना भी उचित नहीं है।

दुनिया के लोगों तक पहुंचना एक अलग बात है, और उन्हें सही से जानना बिल्कुल अलग विषय है। वास्तविक जीवन में हम प्रत्यक्ष रूप से किसी को देखकर उसके विषय में अन्य लोगों से पूछकर या अन्य व्यवहार आदि से उसके बारे में अपनी धारणा या राय बनाते हैं। हमारी धारणा का सही होना भी हमारे जानकारी के स्रोतों व तथ्यों की विश्वसनीयता पर निर्भर है।

ठीक यही तथ्य इंटरनेट के साथ है। जो कि सूचनाओं का बढ़ता हुआ भंड़ार होने के सिवाय और कुछ नहीं। इसे नकारना दुनिया से कट जाना तथा ज्यों का त्यों स्वीकार कर लेने से धोखा होने की संभावना बन जाती है। इंटरनेट पर भी प्राप्त होने वाली किसी भी सूचना का अन्य अनेक उपलब्ध स्रोतों से सत्यापन करके ही स्वीकार करना एकमात्र रास्ता है।

सामान्य जीवन में भी हमें बहुत से लोग मिल जाते हैं जो बात की भूमिका बनाने के लिये फुसफुसाते हुये कुछ इस तरह कहते हैं, “अरे तुम्हें पता नहीं है”, “तुम्हें विश्वास नहीं होगा”, “आश्चर्य जनक बात है” या ” आप चौंक जायेंगे”। इसके बाद कुछ ऐसा रहस्योद्घाटन ” आज आसमान में चार पैरों वाला आदमी उड़कर जाते देखा गया”।

इसी प्रकार की बेसिर-पैर की अनर्गल चीजें तथ्य के नाम पर इंटरनेट पर धड़ल्ले से फैलायी जाती हैं। प्रत्यक्ष या आमने-सामने आंख में आंख डालकर जो बेकार बातें, फुसफुसाकर या बहुत गुपचुप तरीके से पेश की जाती हैं। फैलाने वालों को उनका प्रतिरोध होने का डर भी होता है। इसलिये व्यक्ति से व्यक्ति तक सीधे गलत चीजों का प्रचार कम हो पाता है। वहीं इंटरनेट पर प्रत्यक्ष विरोध का डर न होने से कहने वाले धडल्ले से अपनी बातें प्रस्तुत कर देते हैं। जो बहुत तेजी से विश्वभर में प्रचारित होकर सच लगने लगती है।

बस यही अंतर असल में व इंंटरनेट पर कहे तथ्यों में होता है। जिनका सच जानने के लिये भी अपनी बुद्धि, विवेक का प्रयोग करके निर्णय करना या धारणा बनाना उचित होता है।

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मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग में क्या अंतर है? मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग

वैसे तो मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग में बहुत सी समानताएं है परन्तु कुछ अंतर भी है। चलिए अच्छे से समझते है दोनों में अंतर-

Mobile Banking Aur Internet Banking
Mobile Banking Aur Internet Banking

मोबाइल बैंकिंग

बैंक के द्वारा दी गई वो सेवा है जिसके प्रयोग से आप घर बैठे अपने मोबाइल पे संबंधित बैंक का एप्लिकेशन को डाउनलोड कर , पैसे का लेन – देन और अपने अकाउंट का पूरा ब्यौरा प्राप्त कर सकते है।

  • यंत्र :- मोबाइल या टैबलेट।
  • प्रयोग:- लघु संदेश सेवा, मोबाइल एप्लिकेशन।
  • पैसे का लेन-देन:- NEFT और RTGS के माध्यम से।
  • क्षेत्र :- सीमित।

इंटरनेट बैंकिंग

इंटरनेट बैंकिंग उस तरह का सेवा है जिसमें आप इंटरनेट के प्रयोग से संबंधित बैंक के वेबसाइट के सहायता से , अपने कंप्यूटर या लैपटॉप से पैसे का लेन – देन आसानी से कर सकते है।

  • यंत्र :- कंप्यूटर या लैपटॉप।
  • प्रयोग:- बैंक के वेबसाइट से ।
  • पैसे का लेन-देन:- NEFT , RTGS or IMPS.
  • क्षेत्र :- मोबाइल बैंकिंग से बड़ा।

फूल फॉर्म

  • NEFT = National Electronic Fund Transfer.( नैशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर)
  • RTGS = Real Time Gross Settlement. ( रियल टाइम ग्रॉस सेटेलमेंट)
  • IMPS = Immediate Payment Service. (इमीडिएट पेमेंट सर्विस)

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