Pratham Singh in राजनीति विज्ञान
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लोकतंत्र की मुख्य विशेषताएं बताइये

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Deva yadav
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लोकतंत्र की विशेषताएं

प्रजातंत्र में राजतंत्र जैसे अनेक दोष होने के बावजूद उसमें अनेक विशेषताएं  भी हैं जिससे यह राजतन्त्र की अपेक्षा बहुत अच्छी  व्यवस्था है।  इसमें ये विशेषताएं होती हैं

1. जनता के व्यक्तित्व का निर्माण करने वाली शासन प्रणाली

फील्ड के अनुसार लोकतंत्र का अंतिम औचित्य इस बात में है कि यह नागरिकों के मन में कुछ विशेष प्रवृत्तियां उत्पन्न करता है। इसमें मन स्वतंत्रता पूर्वक विचार करता है ,व्यक्ति सार्वजानिक कार्यों के बारे में सोचता है , उनमें रूचि लेता है,परस्पर चर्चा करता है, उसमें दूसारों के प्रति सहिष्णुता उत्पन्न होती है तथा समाज के प्रति उत्तरदायित्व उत्पन्न होता है।कार्य करने के स्वतंत्रता के कारण यह व्यक्ति के चरित्र के अनेक गुणों का विकास करता है।

2. नैतिक विकास में सहायक

अमेरिका के राष्ट्रपति लावेल ने कहा है शासन की उत्कृष्टता की कसौटी शासन व्यवस्था, आर्थिक समृद्धि या न्याय नहीं है ( सामान्य व्यक्ति इन्हें ही आधार मानता है )अपितु वः चरित्र है जजिसे यह अपने नागरिकों में उत्पन्न करता है। अंततोगत्वा व्ही शासन उत्कृष्ट है जो अपनी जनता में नैतिकता की सुदृढ़ भावना, ईमानदारी, उद्योग,आत्मनिर्भरताऔर साहस के गुण पैदा करता है।  वोट देने का अधिकार नागरिकों में विशेष गरिमा उत्पन्न करता है इससे उसमें गौरव और स्वाभिमान जागृत होता है।

3. लोक शिक्षण का सर्वोत्तम साधन

चुनाव के समय मीडिया द्वारा समस्याओं के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला जाता है जिससे  शासन की अनेक बातों का ज्ञान हो जाता है। कुछ चैने जन प्रतिनिधियों द्वारा विगत ५ वर्ष के कार्यकाल में किये गए कामों की जानकारी देते हैं तथा उनसे प्रश्न भी करते हैं , लोगों के विचार और शिकायतें भी उन्हें सुनवाते हैं। इससे जन सामान्य को भी बहुत जानकारी मिलती है तथा उसे यह ज्ञान हो जाता है कि जन प्रतिनिधियों को क्या-क्या काम करने थे , क्या किय़े और क्या नहीं किये।  इस प्रकार लोगों को कम समय एवं संक्षेप में शासन व्यवस्था की बातें समझ में आ जाती हैं।

4.लोगों में देशभक्ति उत्पन्न करती है

राजतंत्र में लोगों को यह ज्ञात नहीं हो पता है कि राजा का धन कहाँ से आया और कहाँ व्यय हुआ।  वे राजा से कुछ पूछ ही नहीं सकते परन्तु लोकतंत्र में उन्हें अनेक जानकारियां मिलती रहती हैं उसे अपने अधिकार भी समझ में आते हैं वः भी सोचता है कि उसका देश-प्रदेश उन्नति करे।  इस प्रकार लोगों में स्वतः देश प्रेम उत्पन्न होने लगता है।

5. सत्ता का दुरूपयोग रोकना

मंत्रियों पर संसद का दबाव रहता तथा विपक्षी दल भी सरकार की गलत नीतियों का विरोध करते रहते हैं।  मंत्रियों और जन प्रतिनिधियों को चुनाव के समय पुनः जनता से वोट मांगने जाना होता है इससे सरकार के कार्यों पर अंकुश रहता है। जो मंत्री मनमानी करते हैं जनता उन्हें अगले चुनाव में हरा देती है।

6. जनता की इच्छा एवं विशेषज्ञता का सुन्दर समन्वय

हाकिंस ने कहा है कि प्रत्येक शासन में वास्तविक शासक विशेषज्ञ ही होते हैं।  बजट में धन कहाँ से आयगा और जाता की आवश्यकताओं के अनुरूप उसे किस प्रकार व्यय किया जाय यह सामान्य व्यक्ति नहीं बता सकता है , कवही बता सकता है जो अर्थ शास्त्र जान्ने के साथ बजट बानना भी जनता हो।  सड़कें बननी हैं तो कितना व्यय होगा और पहले कहाँ पर सड़क बनाना  उपयुक्त होगा यह कोई विशेषज्ञ ही बता सकता है परन्तु वे जनता की भावनाओं और कष्टों को नहीं समझते हैं।  दूसरी और जन प्रतिनिधि जनता की इच्छाओं और आवश्यकताओं को बताते हैं।  सामान्य रूप से उसी के अनुसार योजनाएं बनती हैं। इस प्रकार लोक इच्छाओं और  विशेषज्ञों के ज्ञान  के समन्वय से शासन चलता रहता है।

7. लोक हित का शासन

इसमें लोगों की इच्छाओं को ध्यान में रख कर योजनाएं बनाई जाती हैं अतः इससे लोगों का हित स्वाभाविक रूप से होता रहता है।

8. राज्य की शक्ति एवं व्यक्ति की स्वतंत्रता का अद्भुत समन्वय

राज्य सत्ता एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता राजशाही में एक दूसरे के विपरीत रहे हैं।  राजा सामंत केवल आदेश देना जानते थे किसी की बात सुनना  नहीं। सामान्य व्यक्ति उन्हें कोई सुझाव देने का विचार भी नहीं कर सकता था। आज लोग स्वतन्त्र रूप से जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करते रहते हैं , नई-नई खोजें होती रहती हैं , नए-नए कार्य होते रहते हैं जो राजशाही में सोचे भी नहीं जा सकते थे।  शासन उन नए अविष्कारों का उपयोग अपनी कार्य क्षमता बढ़ाने में करते रहते हैं और विकास नए आयाम स्थापित करता जाता है।  पहले जहां लोग राजाओं के पास तक नहीं जा पते थे , आज मीडिया वाले मंत्रियों से न केवल  कुरेद-कुरेद कर प्रश्न पूछते है अपितु टीवी के चैनलों पर तो ऐंकर उन्हें  डांटते और उनका उपहास भी करते हैं और मंत्री जी स्वयं को धन्य मानते  हैं कि उन्हें टीवी पर बुलाया गया है।

9. देशभक्ति की भावना का विकास

लोकतंत्र लोगों की अपनी सरकार होती है, अपनी सरकार होने के कारण लोक इसे सफलतापूर्वक चलाने की कोशिश करते हैं, इस तरह लोगो का अपने देश से प्यार बढता हैं और लोग राष्ट्र को अपना राष्ट्र मानते हैं और इसके लिए महान बलिदान करने में संकोच नहीं करते हैं। जे. एस. मिल (J.S. Mill) के कथन के अनुसार, लोकतंत्र लोगों के देश प्यार को बढ़ता है क्योंकि नागरिक यह अनुभव करता है कि सरकार उनकी ही बनाई हुई है और मजिस्ट्रेट उनके मालिक नहीं, सगों सेवक हैं।

10. नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रताओं की सुरक्षा

लोकतांत्रिक प्रणाली के लोगों को अनेक प्रकार के महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त होते हैं। विचार प्रगट करन, सभा करन, सरकार की आलोचना करन, वोट देन, चुनाव लडने आदि जैसे प्रभावशाली अधिकार केवल लोकतांत्रिक प्रणाली में ही संभव होते है, क्योंकि शासन उत्तरदाई होता है और शाशक एक निश्चित समय के लिए सीधे जनता द्वारा प्रत्ख रूप में चुने जाते हैं। इसलिए, शासक लोगों के अधिकारों और स्वतंत्रताओं की उलंघना करने की जुहरत नहीं करते हैं। लोकतांत्रिक प्रणाली में, लोगों के अधिकार और स्वतंत्रताए संरक्षित रहती है। लोगों के अधिकारों की सुरक्षा लिए लोकतंत्र प्रणाली में कानूनी प्रबंध में किए जाते हैं।

11. कानूनों का अधिक पालन

लोकतंत्र में, जनता के चुने हुए प्रतिनिधि कानून का निर्माण करते है। दूसरे शब्दों में, लोग अपने ही प्रत्ख रूप में बनाए कानूनों के अधीन हैं। यह स्वाभाविक है कि, जनता की इच्छा अनुसार जनता के चुने हुए प्रतिनिधि द्वारा बनाए कानूनों की आज्ञा का पालन ज्यादा हो।

Loktantra ki ek visheshta
Best bro thank You
1 logon dwara chune Gaye shasak hi sare pramukh faisle karte Hain
2 chunav logon ke liye nishpaksh avsar aur itne vikalp uplabdh karata hai ki ve chahen to maujuda shasakon ko badal sakte hain
3 yah vikalp aur avsar sabhi logon ko saman Roop se uplabdh ho aur is chunav se bani sarkar sanvidhan dwara tay buniyadi kanoon aur nagrik adhikaron ke dayre ko mante hue kam karti hai

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