Pratham Singh in सामान्य हिन्दी
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तुलसीदास जी पूर्व जन्म में कौन थे? गोस्वामी तुलसीदास की जन्म तिथि श्रावण शुक्ल सप्तमी का उल्लेख किसकी रचना में मिला है *? काशी में तुलसीदास कितने वर्ष रहे? तुलसीदास की मृत्यु तिथि क्या है?

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Deva yadav
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गोस्वामी तुलसीदास जी का बचपन का नाम रामबोला था

तुलसीदास जी पूर्व जन्म में कौन थे?

तुलसीदास जी के विषय में यह भी मान्यता है कि यह पूर्वजन्म में रामायण के लेखक महाकवि बाल्मिकी थे। भगवान राम के अनन्य भक्त होने के कारण ही तुलसीदास जी के रूप में इन्हें राम दर्शन का सौभाग्य मिला। लेकिन तुलसी दास जी को भगवान राम की भक्ति की प्रेरणा अपनी पत्नी रत्नावली से प्राप्त हुई थी।

गोस्वामी तुलसीदास का जन्म कब हुआ था

रामचरितमानस की रचना संवत्‌ १६३१ का प्रारम्भ हुआ। दैवयोग से उस वर्ष रामनवमी के दिन वैसा ही योग आया जैसा त्रेतायुग में राम-जन्म के दिन था। उस दिन प्रातःकाल तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस की रचना प्रारम्भ की।

काशी में तुलसीदास कितने वर्ष रहे?

वहाँ से कुछ दिन बाद गुरु-शिष्य दोनों शूकरक्षेत्र (सोरों) पहुँचे। वहाँ श्री नरहरि जी ने तुलसीदास को रामचरित सुनाया। कुछ दिन बाद वह काशी चले आये। काशी में शेषसनातन जी के पास रहकर तुलसीदास ने पन्द्रह वर्ष तक वेद-वेदांग का अध्ययन किया।

तुलसीदास की मृत्यु तिथि क्या है?

31 जुलाई 1623

तुलसीदास जी भव कैसे तैरेंगे?

तुलसीदास जी कहते है कि जो मेरा शरीर है पूरा चमड़े से बना हुआ है जो कि नश्वर (Mortal) है। फिर इस चमड़े से इतना मोह छोड़कर राम नाम में अपना ध्यान लगाते तो आज भवसागर से पार हो जाते। दया धर्म का मूल है पाप मूल अभिमान। ... तुलसी दास जी कहते है कि धर्म दया भावना से उत्पन होता है और अभिमान जो की सिर्फ पाप को ही जन्म देता है।

तुलसीदास का जन्म कहाँ पर हुआ था?

सोरोन

तुलसीदास की माता का क्या नाम था?

हुलसी दुबे

तुलसीदास की काव्य भाषा क्या है?

हिन्दी एवं संस्कृत भाषा

तुलसीदास की मृत्यु कहाँ हुई?

31 जुलाई 1623

रामचरित मानस में कुल कितने कांड है?

रामचरितमानस को गोस्वामी जी ने सात काण्डों में विभक्त किया है। इन सात काण्डों के नाम हैं - बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड (युद्धकाण्ड) और उत्तरकाण्ड। छन्दों की संख्या के अनुसार बालकाण्ड और किष्किन्धाकाण्ड क्रमशः सबसे बड़े और छोटे काण्ड हैं।

तुलसीदास की पहली रचना कौन सी है?

इसमें रामलला नहछू को तुलसी की पहली रचना बताया गया है. इसके अलावा रामाज्ञा प्रश्न, जानकी मंगल, पार्वती मंगल, गीतावली, कृष्ण गीतावली, बरवै रामायण, दोहावली, कवितावली और हनुमानबा'क की विशेषताओं का भी उल्लेख है.

तुलसी के राम की कौन सी विशेषताएं?

तुलसी न सिर्फ अनन्य रामभक्त थे, परंतु अपने समय के जागरूक लोकनायक भी थे । वे शील, सौंदर्य और शक्ति के उपासक थे । तुलसी की भक्तिभावना में लोक-मंगल की प्रबल भावना है । उनके आराध्य राम शील, सौंदर्य और शक्ति, तीनों के गुण सागर हैं ।

तुलसीदास जी को हिंदी जगत का क्या कहा जाता है?

हिन्दी साहित्य जगत के सितारे कहे जाने वाले कवि गोस्वामी तुलसीदास का नाम आते ही लोग रामचरित मानस को याद करते हैं।

तुलसीदास जी ने रामायण कब लिखी?

पत्नी की बात सुन तुलसीदास परेशान हुए और वापस लौट गए। इसके बाद वह जगह-जगह जाकर राम कथा सुनाते रहे। काफी समय काशी और अयोध्या में भी रहे। - इस बीच सपने में भगवान के आदेश के बाद उन्होंने 1587 में रामचरित मानस की रचना शुरू की।

तुलसीदास जी की कीर्ति का आधार कौन सा ग्रंथ माना जाता है उसमें निहित सभी कांडों का क्रमिक नाम लिखिए?

उत्तर- रामचरितमानस तुलसीदासजी का सुदृढ़ कीर्ति स्तम्भ है जिसके कारण वे संसार में श्रेष्ठ कवि के रूप में जाने जाते हैं। सात काण्डों के नाम हैं - बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड (युद्धकाण्ड) और उत्तरकाण्ड।

तुलसीदास दोहावली के अनुसार श्रीराम के योगदान करने से कौन से चार फलों की प्राप्ति होती है?

जवाब: तुलसीदास दोहावली के अनुसार श्रीराम के यशोगान धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष नामक फलों की प्राप्ति होती है। ये बात तुलसीदास ने तुलसीदास दोहावली में कही थी जो की उनका दोहों का एक संग्रह ग्रंथ है, जिसके अंदर आपको 573 दोहे देखने को मिलते है।

समन्वयवादी रचनाकार कौन है?

Chattisgarhi Sahitya - समन्वयवादी कवि गोस्वामी तुलसीदास |

गोस्वामी तुलसीदास की प्रमुख महाकाव्य का नाम क्या है?

महत्वपूर्ण रचनाएँ - रामललानहछू(1582), वैराग्यसंदीपनी(1612), रामाज्ञाप्रश्न(1612), जानकी-मंगल(1582), रामचरितमानस(1574), सतसई, पार्वती-मंगल(1582), गीतावली(1571), विनय-पत्रिका(1582), कृष्ण-गीतावली(1571), बरवै रामायण(1612), दोहावली(1583) और कवितावली(1612) आदि।

तुलसीदास की भक्ति भावना का मुख्य स्वर क्या है?

उनके आराध्य देव दशरथपुत्र राम हैं। इन्हें राम भक्ति का सबसे श्रेष्ठ कवि माना जाता है। इन्होंने अपनी रचनाओं में राम के प्रति अनन्य भक्ति भाव को प्रकट किया है।

गीतावली की काव्य भाषा कौन सी है?

गीतावली गोस्वामी तुलसीदास की काव्य कृति है। गीतावली तुलसीदास की प्रमाणित रचनाओं में मानी जाती है। यह ब्रजभाषा में रचित गीतों वाली रचना है जिसमें राम के चरित की अपेक्षा कुछ घटनाएँ, झाँकियाँ, मार्मिक भावबिन्दु, ललित रस स्थल, करुणदशा आदि को प्रगीतात्मक भाव के एकसूत्र में पिरोया गया है।

कवितावली की काव्य भाषा क्या है?

कवितावली, गीतावली और विनयपत्रिका की रचना ब्रजभाषा में की।

दोहावली की भाषा क्या है?

हिन्दी

भक्ति काव्य धारा में तुलसी का स्थान विशिष्ट क्यों है?

वस्तुतः तुलसीदास जी एक उच्चकोटि के कवि और भक्त थे तथा उनका हृदय भक्ति के पवित्रतम भावों से परिपूर्ण था। तुलसी का अपने साहित्य में भाषा और भावों पर पूर्ण अधिकर था। वे संस्कृत के प्रकाण्ड पंडित थे। लोकहित की भावना से प्रेरित होकर उन्होंने जनभाषाओं को ही अपने साहित्य का माध्यम बनाया।

तुलसी के रामचरित मानस की भाषा कौन सी है *?

श्री रामचरितमानस अवधी भाषा में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा १६वीं सदी में रचित एक महाकाव्य है। इस ग्रन्थ को अवधी साहित्य (हिंदी साहित्य) की एक महान कृति माना जाता है।

रामायण में कुल कितने दोहे हैं?

रामचरितमानस को गोस्वामी तुलसीदास ने रचित किया था। यह अवधी भाषा में रचा गया एक ग्रंथ है। इसमें 9388 चौपाइयांस 1172 दोहे, 87 सोरठे, 47 श्लोक और 208 छंद हैं। जिनकी संख्या कुल मिलाकर 10902 है। 

रामायण में कितने पेज होते हैं?

रामायण हिन्दू स्मृति का वह अंग हैं जिसके माध्यम से रघुवंश के राजा राम की गाथा कही गयी। यह आदि कवि वाल्मीकि द्वारा लिखा गया संस्कृत का एक अनुपम महाकाव्य है। इसके २४,००० श्लोक हैं। इसे आदिकाव्य तथा इसके रचयिता महर्षि वाल्मीकि को 'आदिकवि' भी कहा जाता है।

गोस्वामी तुलसीदास की अंतिम रचना कौन सी है?

इनके अतिरिक्त रामसतसई अथवा तुलसी सतसई (747 दोहे, अवधी और ब्रज दोनों भाषाओं में), संकट मोचन हनुमानाष्टक, रामनाम मणि, कोष मञ्जूषा, विनयावली, कवित्तरामायण, राम शलाका, हनुमान चालीसा, हनुमान बाहुक (अंतिम रचना, ब्रजभाषा में) आदि आपके ग्रंथ भी प्रसिद्ध हैं।

दोहावली की रचना कब हुई?

दोहावली तुलसीदास द्वारा रचित दोहों का एक संग्रह ग्रंथ है। दोहावली में 573 दोहे संकलित हैं। इनमें से रामचरित मानस के ८५ दोहे और रामाज्ञा प्रश्न के ३५ दोहे मिलते हैं।

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